डिंडोरी में कागजी नशामुक्ति और गलियों में बहती 'मधुशाला

 नर्मदे हर! कहते हैं 'काजल की कोठरी' में जो भी जाता है, उसके हाथ काले होना तय है। आज डिंडोरी की आबकारी व्यवस्था और प्रशासनिक अमले की चुप्पी इसी कहावत को चरितार्थ कर रही है। जिले में कागजों पर तो कड़े नियमों की इबारत लिखी गई है, लेकिन धरातल पर हकीकत यह है कि सरकारी फाइलों की स्याही सूखने से पहले ही गली-गली में अवैध शराब की नदियां बहने लगती हैं। शासन के आदेश और नियमों की मर्यादा को ताक पर रखकर जिस तरह से युवा पीढ़ी को नशे के गर्त में धकेला जा रहा है, वह न केवल चिंताजनक है बल्कि व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता प्रमाण भी है।

नर्मदा की लहरों पर 'शराब' का पहरा?

मध्य प्रदेश शासन ने पवित्र नर्मदा की मर्यादा को अक्षुण्ण रखने हेतु तटों के समीप शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। सरकार की मंशा माँ नर्मदा की शुचिता बनाए रखने की थी, किंतु डिंडोरी में इस आदेश का पालन केवल आदेश  तक सीमित नजर आता है। विडंबना देखिए कि जहाँ श्रद्धा की लहरें होनी चाहिए, वहाँ आज अवैध शराब के सिंडिकेट ने अपना जाल फैला रखा है। यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक गहरा कटाक्ष है कि जो शासन माँ नर्मदा के संरक्षण की बात करता है, उसी के नाक के नीचे नियम विरुद्ध व्यापार फल-फूल रहा है।



मौन की गूँज और 'काले' हाथ

जिले में चल रहे इस अवैध कारोबार के पीछे 'अंदरखाने' की कहानी कुछ और ही बयां करती है। आखिर क्या कारण है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे  इस खुली लूट और अवैध व्यापार पर मौन साधे हुए हैं? इस खामोशी के पीछे की गूँज यह संकेत देती है कि इस काले कारोबार में रक्षक ही भक्षक की भूमिका में हैं। सफेदपोश चेहरों और रसूखदारों के संरक्षण में युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। 'अच्छे-अच्छों' के दामन पर लगे ये दाग अब चीख-चीखकर जवाब मांग रहे हैं।

 समय रहते चेत जाएँ!

व्यवस्था की इस अनदेखी के खिलाफ हमारे पास ऐसी पुख्ता जानकारियाँ और सबूत एकत्रित होने लगे हैं, जो कई बड़े और रसूखदार नामों को सार्वजनिक रूप से उजागर कर देंगे। जो लोग स्वार्थ के वशीभूत होकर मैया के इस पवित्र धाम और आबोहवा को दूषित कर रहे हैं, उनसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि अभी भी समय है, चेत जाएँ! 

माँ रेवा का कर्ज उतारने का यह सही अवसर है—इस गंदे खेल से पीछे हटें और समाज को नशा मुक्त बनाने में साथ आएँ।

याद रहे, हमारी मुहिम साक्ष्यों पर आधारित है। बाद में यह शिकायत न कीजिएगा कि हमारा नाम इस सूची में क्यों शामिल किया गया, क्योंकि सत्य प्रहार अब प्रमाणों के साथ हर उस चेहरे से नकाब हटाएगा जिसने मर्यादाओं को लांघा है। चाहे वह छोटा प्यादा हो या बड़ा खिलाड़ी, सबकी जवाबदेही अब जनता के सामने तय होगी।

एक विनम्र अपील: नगर के सजग प्रहरी बनें

हम नगर के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करते हैं कि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ हमारे सारथी बनें। यदि आपके आसपास कहीं भी शराब का अवैध विक्रय हो रहा है या आपको किसी भी प्रकार के अनुचित लेन-देन और कमीशन के खेल की जानकारी है, तो निःसंकोच हमें सूचित करें। आपकी पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। यह लड़ाई केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य की है।

नर्मदे हर!

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