तेलंगाना में बंधक बने डिंडोरी के 26 श्रमिकों का सफल रेस्क्यू, एक बेटी की सजगता और प्रशासन की तत्परता से मिली मुक्ति

 

सत्य प्रहार न्यूज़

डिंडोरी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से रोजगार की तलाश में बाहरी राज्यों की ओर पलायन करने वाले श्रमिकों के शोषण का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। तेलंगाना के कोठागुडेम में बंधक जैसी स्थितियों का सामना कर रहे मेहदवानी ब्लॉक के 26 श्रमिकों को जिला प्रशासन की सक्रियता के बाद सकुशल मुक्त करा लिया गया है। यह संपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन एक बेटी की हिम्मत और जिला कलेक्टर की त्वरित न्याय प्रक्रिया की परिणति है।



पसीने पर भारी पड़ी ठेकेदारों की धोखाधड़ी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेहदवानी ब्लॉक के ग्राम सुकलौरी, पिडरूखी और धनगाँव के 26 श्रमिक बीते 10 जनवरी 2026 को रोजगार की तलाश में तेलंगाना गए थे। इन श्रमिकों को स्थानीय ठेकेदार विवेंद्र और रज्जू द्वारा मिर्च तुड़ाई के कार्य में नियोजित किया गया था। कार्य समाप्ति के उपरांत जब श्रमिकों ने अपने पारिश्रमिक की मांग की, तो संबंधित ठेकेदारों ने भुगतान करने से स्पष्ट मना कर दिया। पर्याप्त आर्थिक संसाधन न होने के कारण श्रमिकों के समक्ष न केवल जीवन-यापन का संकट खड़ा हुआ, बल्कि उनकी गृह ग्राम वापसी की राह भी अवरुद्ध हो गई।

एक पुत्री का साहस और प्रशासनिक हस्तक्षेप

जब परदेस की धरती पर श्रमिक न्याय के लिए भटक रहे थे, तब श्रमिक घनश्याम मरावी की पुत्री रोशनी मरावी ने इस अन्याय के विरुद्ध आवाज बुलंद की। रोशनी ने 31 मार्च को जिला मुख्यालय स्थित जनसुनवाई में उपस्थित होकर कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदोरिया के समक्ष वस्तुस्थिति प्रस्तुत की। मामले की गंभीरता और श्रमिकों के मौलिक अधिकारों के हनन को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल एक संयुक्त जांच दल गठित किया।

इस दल में श्रम अधिकारी नीरज टेकाम, पुलिस विभाग के एएसआई, महिला आरक्षक, राजस्व अधिकारी और 'जन साहस' संस्था के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। प्रशासनिक दल ने अविलंब तेलंगाना पहुँचकर वहां के स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित किया और ठेकेदारों पर विधिक दबाव बनाया।

सक्षम कार्रवाई और सफल रेस्क्यू

प्रशासनिक हस्तक्षेप का परिणाम यह रहा कि ठेकेदारों को न केवल श्रमिकों का पूर्ण बकाया भुगतान करना पड़ा, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी के मार्ग भी प्रशस्त हुए। अपनी मेहनत की कमाई मिलने के बाद सभी 26 श्रमिक सकुशल डिंडोरी वापस लौटे। जिले में वापसी के उपरांत कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदोरिया ने श्रमिकों से व्यक्तिगत संवाद किया।

प्रशासनिक समझाइश: पलायन नहीं, स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता

कलेक्टर श्रीमती भदोरिया ने श्रमिकों को भविष्य में इस प्रकार के जोखिमपूर्ण पलायन से बचने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिले में ही मनरेगा के तहत पर्याप्त कार्य उपलब्ध हैं, साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से शासन द्वारा राशन की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिक शासन की स्थानीय योजनाओं से जुड़कर अपने अधिकारों की रक्षा करें ताकि दोबारा ऐसी विषम परिस्थितियां उत्पन्न न हों।

सत्य प्रहार न्यूज़ भी समस्त नागरिकों से अपील करता है कि किसी भी प्रकार के प्रलोभन में आकर अनाधिकृत ठेकेदारों के साथ पलायन न करें और स्थानीय स्तर पर संचालित शासकीय योजनाओं का लाभ उठाएं।

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