डिंडोरी नगर परिषद के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (AHP घटक) के क्रियान्वयन में सामने आई हालिया विसंगतियों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक न्याय की अवधारणा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। शासन की इस अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना का मूल उद्देश्य समाज के उस अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को छत उपलब्ध कराना है जिसके पास अपना कोई आशियाना नहीं है। किंतु, परिषद द्वारा अब तक आवंटित किए गए आवासों की प्रक्रिया में जिस प्रकार की अनियमितताओं की चर्चाएं व्याप्त थीं, वे अब जांच की दहलीज पर आकर सच साबित होती दिखाई दे रही हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह स्वर मुखर थे कि योजना के वास्तविक हकदारों को दरकिनार कर उन रसूखदार व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया है जो आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं और जिनके पास पूर्व से ही निजी संपत्तियां मौजूद हैं।
इन शिकायतों की संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए डिंडोरी कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने एक निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। इस जांच दल में नायब तहसीलदार शशांक शेंडे, उपयंत्री यशवंत मशराम और राजस्व निरीक्षक हेमंत उइके जैसे अधिकारियों को सम्मिलित कर भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए। जब इस समिति ने धरातल पर पहुंचकर 83 आवंटित आवासों की सूक्ष्मता से पड़ताल की, तो जो तथ्य उभरकर सामने आए वे विचलित करने वाले थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुल 34 आवासों में भारी अनियमितताएं पुष्ट हुई हैं। इनमें से 8 आवास ऐसे पाए गए जिनमें मूल आवंटी स्वयं निवास न कर उन्हें व्यावसायिक लाभ हेतु किराए पर संचालित कर रहे थे। वहीं, 26 आवासों में लंबे समय से ताले लटके मिले, जो इस कड़वे सच को उजागर करते हैं कि इन आवंटियों को वास्तव में सिर छुपाने के लिए किसी सरकारी सहायता की आवश्यकता ही नहीं थी।
सत्य प्रहार की टीम ने जब इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल की, तो केवल आवंटन की प्रक्रिया ही नहीं बल्कि निर्माण की गुणवत्ता में भी भारी तकनीकी खामियां दृष्टिगोचर हुईं। नवनिर्मित आवासों के ढांचे में दरारें और विशेषकर प्लिंथ बीम (Plinth Beam) जैसे महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे में आए क्रैक यह दर्शाते हैं कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों की घोर अनदेखी की गई है। इस विषय पर जब कांग्रेस पार्षद आदित्य जी से संवाद किया गया, तो उन्होंने इसे सीधे तौर पर निर्धन परिवारों के अधिकारों का हनन और व्यवस्था की विफलता करार दिया। दूसरी ओर, जब हमने नगर परिषद अध्यक्षा श्रीमती सुनीता सारस का पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने इस संवेदनशील विषय पर अनभिज्ञता प्रकट करते हुए स्वयं को इस प्रक्रिया से पृथक रखने का प्रयास किया।
प्रशासनिक स्तर पर अब कठोर कार्यवाही की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। कलेक्टर के आदेशानुसार, इन सभी 34 चिन्हित हितग्राहियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगामी 6 अप्रैल 2026 की संध्या 4 बजे तक कलेक्ट्रेट कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर प्रदान किया गया है। यदि निर्धारित समयावधि में ये आवंटी अपनी पात्रता के साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो प्रशासन इनका आवंटन निरस्त कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। सत्य प्रहार न्यूज़ के पास इन सभी 34 व्यक्तियों की आधिकारिक सूची और जारी किए गए नोटिस की प्रतियां उपलब्ध हैं, जिन्हें सुधि पाठक हमारी वेबसाइट पर देख सकते हैं। अब संपूर्ण जिले की दृष्टि 6 अप्रैल की उस तिथि पर टिकी है जब इन संदेही आवंटियों को प्रशासन के समक्ष उत्तरदायी होना पड़ेगा। सत्य प्रहार इस पूरे घटनाक्रम की निरंतर निगरानी कर रहा है ताकि जनहित और शुचिता की रक्षा हो सके।
List of 34 (attached)
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