डिंडोरी। प्रधानमंत्री आवास योजना का मुख्य उद्देश्य हर गरीब के सिर पर अपनी छत देना है, लेकिन डिंडोरी नगर परिषद की कार्यप्रणाली इस योजना की मूल भावना पर ही गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हाल ही में कलेक्टर कार्यालय द्वारा गठित एक विशेष टीम ने शहर के 85 मकानों का भौतिक सत्यापन किया, जिसमें से 34 नाम ऐसे सामने आए जो या तो अपने आवास में ताला लगाकर गायब हैं या फिर उन्हें किसी और को किराए पर दे दिया गया है। इन सभी को नोटिस जारी कर दिया है, लेकिन सत्य प्रहार न्यूज़ की पड़ताल में इस पूरी कार्रवाई के पीछे की एक ऐसी सच्चाई सामने आई है जो डिंडोरी नगर परिषद को ही कठघरे में खड़ा कर रही है।
इस पूरी जांच सूची में एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है रिंकू बर्मन का, जो पेशे से एक छोटे फुटकर सब्जी विक्रेता हैं और रोज दिहाड़ी कर अपना पेट पालते हैं। प्रशासन के नोटिस में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि रिंकू का "आवास बंद पाया गया", लेकिन जब हमारे संवाददाता अभिलाष शुक्ला ने रिंकू से मुलाकात की तो हकीकत कुछ और ही निकली। रिंकू का कहना है कि उन्होंने लगभग डेढ़ साल पहले ही अपने आवास की पूरी अंश राशि जमा कर दी थी, लेकिन विडंबना देखिए कि नगर परिषद ने उन्हें आज तक उनके घर की चाबी ही नहीं सौंपी है। रिंकू का सीधा सवाल है कि जब उन्हें घर का कब्जा ही नहीं मिला और वे अंदर जा ही नहीं सकते, तो फिर वह मकान खुला कैसे रह सकता है? नोटिस की जानकारी मिलने के बाद रिंकू ने न्याय की उम्मीद में सत्य प्रहार न्यूज़ से संपर्क किया और बताया कि वे आज भी दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी फाइलों में उन्हें मकान का मालिक मानकर अब दोषी ठहराया जा रहा है।
मामला केवल रिंकू तक ही सीमित नहीं है, जब हमारी टीम ने सब्जी मंडी पहुंचकर अन्य लोगों से बात की तो वहां शिकायतों का अंबार लग गया। कई मजदूरों और गरीब तबके के लोगों का आरोप है कि साल 2017 से उनसे 20-20 हजार रुपये जमा करवा लिए गए हैं, लेकिन आज 9 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अपने सपनों का घर नसीब नहीं हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि नगर परिषद ने कलेक्टर कार्यालय को वह लिस्ट थमा दी है जिसमें कागजों पर तो आवास आवंटित दिखा दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असल पात्रों को अंधेरे में रखा गया है। यह जांच का एक बहुत बड़ा विषय है कि आखिर किन परिस्थितियों में पात्र लोगों की राशि दबाकर उन्हें बेघर छोड़ दिया गया और किन चहेतों को गुपचुप तरीके से लाभ पहुंचाया गया।
यह पूरी विसंगति प्रशासन को गुमराह करने और गरीबों के हक पर डाका डालने जैसा मामला नजर आती है। एक तरफ जहां सरकार हर गरीब को घर देने का दावा करती है, वहीं डिंडोरी नगर परिषद की इस लापरवाही ने वास्तविक हितग्राहियों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। सत्य प्रहार न्यूज़ जिला प्रशासन से पुरजोर अपील करता है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। हमारी मांग है कि रिंकू बर्मन जैसे असल पात्रों की शिकायतों का तुरंत निराकरण हो और उन्हें जल्द से जल्द उनके मकानों का भौतिक कब्जा दिलाया जाए ताकि वे सम्मान के साथ अपने घर में रह सकें।
डिंडोरी से अभिलाष शुक्ला की रिपोर्ट।
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