राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए डिण्डौरी जिले को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक जंग छिड़ गई है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के कुशल निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज पांडेय के नेतृत्व में विश्व क्षय रोग दिवस के उपलक्ष्य में शुरू किया गया 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान अब धरातल पर तेजी से दौड़ रहा है। जिले के चिन्हित 233 ग्रामों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें मुस्तैदी से जुटी हैं ताकि हर संभावित मरीज की पहचान कर उसे उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता क्षेत्रीय स्तर पर ही हैंड हेल्ड एक्सरे मशीनों के माध्यम से की जा रही त्वरित जांच है जिससे मरीजों को अब दूर नहीं भटकना पड़ रहा है।
इसी कड़ी में आज दिनांक 13 अप्रैल 2026 को विकासखण्ड डिण्डौरी के ग्राम निगवानी में एक विशेष स्वास्थ्य कैंप का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के साथ 99 लोगों की अत्याधुनिक हैंड हेल्ड एक्सरे मशीन से जांच की और 87 लोगों के बलगम के नमूने लिए। स्वास्थ्य विभाग की यह सक्रियता केवल एक ब्लॉक तक सीमित नहीं है बल्कि विकासखण्ड शहपुरा के ग्राम गपाईया और मोहनी में भी इसी तरह के सघन कैंप आयोजित किए गए। शहपुरा क्षेत्र के इन दोनों गांवों में कुल 107 लोगों का एक्सरे किया गया और 83 संदिग्ध मरीजों की खखार जांच की गई। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दो हफ्ते से अधिक की खांसी, वजन में गिरावट, रात में पसीना आना और सीने में दर्द जैसे लक्षणों वाले व्यक्तियों की पहचान करना है। विशेषकर मधुमेह और एचआईवी जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि उनमें संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से संचालित यह अभियान डिण्डौरी को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। सत्य प्रहार न्यूज़ आप सभी पाठकों से अपील करता है कि यदि किसी में भी टीबी के लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और इस महाभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें।
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