नगर परिषद डिंडौरी: आयुक्त और कलेक्टर को सौंपी गई गंभीर अनियमितताओं की विस्तृत शिकायत

डिंडौरी। नगर परिषद डिंडौरी की वर्तमान कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी  द्वारा नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, भोपाल के आयुक्त और जिला कलेक्टर डिंडौरी को सौंपे गए एक विस्तृत शिकायती आवेदन में परिषद के भीतर व्याप्त कथित वित्तीय अनियमितताओं, पद के दुरुपयोग और शासकीय नियमों की अनदेखी की ओर उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया है। इस शिकायती पत्र के सार्वजनिक होने के बाद से ही क्षेत्र के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

वित्तीय विसंगतियों और संदिग्ध भुगतानों पर उठे सवाल

शिकायती आवेदन में सबसे प्रमुख मुद्दा "सेवार्थी सोशल वेलफेयर" नामक संस्था को किए गए लगभग 13 लाख रुपये के भुगतान का है। आवेदन के अनुसार, यह संदिग्ध लेन-देन शासकीय धन के अनुचित उपयोग की ओर स्पष्ट संकेत देता है, जिसकी सूक्ष्मता से जाँच की जानी आवश्यक है। इसके साथ ही, वार्ड क्रमांक 13 में निर्माणाधीन सुलभ शौचालय की स्वीकृति प्रक्रिया और उसकी वास्तविक लागत में पारदर्शिता के अभाव को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। आरोप है कि परिषद की वर्तमान व्यवस्था में नियमों को ताक पर रखकर चहेते वेंडरों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

निर्माण कार्यों में व्यक्तिगत लाभ और नियमों का उल्लंघन

वार्ड क्रमांक 12 में हुए एक सड़क निर्माण कार्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि लगभग 17 लाख रुपये की सार्वजनिक राशि से निर्मित यह सड़क जनहित के बजाय व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति के लिए बनाई गई है। आरोप है कि यह निर्माण कार्य मुख्य रूप से अध्यक्ष द्वारा अपने निजी भूखंडों (प्लॉट्स) के बाजार मूल्य को बढ़ाने के उद्देश्य से कराया गया है, जो पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 13 में शासकीय जलाशय की सीमा के भीतर किए गए निर्माण कार्यों को भी पूर्णतः नियम विरुद्ध बताया गया है। लगभग 58 लाख रुपये की इस भारी-भरकम परियोजना के लिए जल संसाधन विभाग से अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई। इतना ही नहीं, जलाशय के मध्य से सीवर लाइन बिछाने के निर्णय को पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत घातक और चिंताजनक माना जा रहा है।

प्रशासनिक गरिमा और सेवा नियमों की अनदेखी

शिकायत में केवल वित्तीय मामले ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मर्यादाओं के उल्लंघन के प्रकरण भी शामिल हैं। आवेदन में नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सारस और उनके पति श्री अशोक सारस (जो वर्तमान में नगर परिषद नैनपुर में मुख्य नगरपालिका अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं) पर अपने संवैधानिक पदों के प्रभाव का अनुचित उपयोग करने का संगीन आरोप लगाया गया है।

एक अन्य गंभीर विषय नगर परिषद के एक स्थाई कर्मचारी के निजी उपयोग से संबंधित है। आरोप है कि अध्यक्ष महोदया द्वारा एक शासकीय कर्मचारी को अपने व्यक्तिगत कार्यों हेतु स्थाई ड्राइवर के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जो कि स्पष्ट रूप से शासकीय सेवा नियमों का उल्लंघन है। इन सभी बिंदुओं को साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करते हुए प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की माँग की गई है।

SIT जाँच और वैधानिक कार्यवाही की माँग

शिकायतकर्ता  ने प्रशासन से निवेदन किया है कि इन सभी प्रकरणों की एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित कर समयबद्ध और पारदर्शी जाँच कराई जाए। उन्होंने माँग की है कि यदि ये वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएँ सिद्ध होती हैं, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत दोषियों पर कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जनता के पैसे के हुए नुकसान की भरपाई और वसूली की भी अपील की गई है। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा इस शिकायत पर लिए जाने वाले संज्ञान का सभी को इंतजार 

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