मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की सुगबुगाहट ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा इसे दीपावली तक लागू करने के लक्ष्य और ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देशों के बाद अब विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा नीत सरकार की मंशा और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से चर्चा करते हुए सिंघार ने सीधे तौर पर पूछा कि क्या प्रस्तावित UCC में दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों, परंपराओं और रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखा जाएगा? उन्होंने सरकार की स्पष्टता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस कानून के प्रभाव को लेकर इन वर्गों में भारी चिंता है, जिससे एक नया राजनीतिक टकराव पैदा हो गया है।
सिंघार के इन सवालों को धरातल पर आदिवासी समुदायों के कड़े विरोध से भी बल मिल रहा है। प्रदेश के आदिवासी नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें इस कानून के दायरे में जबरन लाया गया, तो राज्यव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। विधायक हीरालाल अलावा और जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा जैसे प्रमुख चेहरों ने साफ कर दिया है कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासियों को मिले विशेष संवैधानिक अधिकार और पेसा (PESA) कानून के तहत मिलने वाली स्वायत्तता गैर-परक्राम्य है। उनका कहना है कि आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान और उनके पारंपरिक कानूनों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जैसा कि उत्तराखंड और गुजरात में भी आदिवासी समुदायों को इन कानूनों से बाहर रखकर किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के संवैधानिक ढांचे में आदिवासी और दलित समुदायों के लिए विशिष्ट सुरक्षा कवच दिए गए हैं, ताकि उनकी विशिष्ट पहचान बनी रहे। ऐसे में सरकार के लिए इन वर्गों को विश्वास में लिए बिना आगे बढ़ना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। जहां एक ओर कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को दलित और आदिवासी विरोधी बताकर घेर रही है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी संगठन अपनी परंपराओं की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। फिलहाल, राज्य सरकार ने कानून के अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने की बात कही है, लेकिन विपक्ष और सामाजिक संगठनों के बढ़ते दबाव ने UCC के भविष्य पर कई सवालिया निशान लगा दिए हैं।
Source - Various Media Reports (We did not claim authenticity of it, please check facts before reading or sharing)
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