विशेष रिपोर्ट: 32 करोड़ का 'हैंडपंप प्लान' तैयार, पर धरातल पर कितनी चुनौती?

 ब्यूरो रिपोर्ट, सत्य प्रहार न्यूज़

भोपाल/डिंडोरी: मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने प्रदेश के सूखा संभावित क्षेत्रों के लिए 32 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ 1,878 नए हैंडपंप लगाने की योजना को हरी झंडी दे दी है।


विभागीय सूत्रों के अनुसार, उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस बार रणनीति 'वॉटर-स्ट्रेस्ड' यानी उन इलाकों पर केंद्रित है जहाँ भू-जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। योजना के तहत प्रदेश के 7 प्रशासनिक जोनों के 56 जिलों को कवर किया जा रहा है, जिसमें इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल जैसे बड़े जोन शामिल हैं।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की जंग सूत्रों ने बताया कि विभाग के पास राइजर पाइप और अन्य जरूरी सामग्री की खेप पहुंच चुकी है, जिसे जिलों में डिस्पैच किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस बार 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम कर रहे हैं ताकि भीषण गर्मी के दौरान किसी भी ग्रामीण को मीलों दूर पानी के लिए न भटकना पड़े। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल नए हैंडपंप लगा देने से समस्या हल होगी, या गिरता जलस्तर इन मशीनों को भी 'शो-पीस' बना देगा?

PHE विभाग  डिंडोरी के लिए बड़े सवाल

 चिन्हांकन और पारदर्शिता (Identification) डिंडोरी जिले के अंतर्गत आने वाले किन-किन विकासखंडों (ब्लॉक्स) और विशेष रूप से किन ग्राम पंचायतों को 'डेंजर ज़ोन' (सूखा संभावित) माना गया है? क्या विभाग के पास इन चिन्हित गांवों की कोई सार्वजनिक सूची उपलब्ध है?

बजट और आवंटन (Budgetary Clarity) प्रदेश स्तर पर स्वीकृत 32 करोड़ की राशि में से आदिवासी बाहुल्य जिले डिंडोरी के हिस्से में कितनी राशि और कितने हैंडपंप आए हैं? क्या यह आवंटन जनसंख्या के आधार पर है या केवल भौगोलिक संकट के आधार पर?

पुरानी विफलता और नई योजना (Failure vs. Planning)पिछले वर्षों में लगाए गए कितने हैंडपंप वर्तमान में चालू स्थिति में हैं? क्या नए हैंडपंप लगाने से पहले विभाग ने पुराने, सूखे पड़े हैंडपंपों की मरम्मत या उनके 'रिचार्ज' के लिए कोई तकनीकी सर्वे किया है?

भौगोलिक चुनौतियां (Geographical Hurdles)डिंडोरी जैसे पथरीले और पहाड़ी क्षेत्रों में जहाँ मशीनें पहुंचना मुश्किल है, वहां खनन (Drilling) के लिए विभाग के पास क्या विशेष कार्ययोजना है? क्या वहां के लिए अलग से 'रिंग मशीन' या छोटी मशीनों की व्यवस्था की गई है?

 समय-सीमा और जवाबदेही (Deadline) गर्मी का सीजन अपने चरम पर पहुंचने वाला है। ऐसे में इन 1,878 हैंडपंपों को लगाने का काम कब तक शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा? यदि समय पर काम नहीं हुआ, तो इसके लिए किस स्तर के अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?

भ्रष्टाचार पर अंकुश (Anti-Corruption) अक्सर देखा जाता है कि कागजों पर हैंडपंप लग जाते हैं लेकिन जमीन पर पाइप गायब मिलते हैं। इस योजना में 'थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन' और सामग्री की गुणवत्ता (ISO Quality) सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने क्या कड़े कदम उठाए हैं?


सत्य प्रहार न्यूज़ प्रशासन से इन सवालों के जवाब की अपेक्षा रखता है ताकि जनता की गाढ़ी कमाई का सही सदुपयोग हो सके और हर घर तक पानी पहुँच सके।

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