शहपुरा बाईपास निर्माण '? PMO और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक पहुँचेगी शारदा टेकरी पुलिया की शिकायत

 डिंडौरी। जबलपुर–अमरकंटक नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य में बरती जा रही कथित लापरवाही और तकनीकी मानकों से समझौते का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। कुण्डम से शहपुरा के बीच चल रहे इस वृहद सड़क निर्माण प्रोजेक्ट के तहत शहपुरा बाईपास में शारदा टेकरी के पास निर्माणाधीन एक पुलिया में तय नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों ने इस राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पेटी ठेकेदार द्वारा निर्माण प्रक्रिया के अनिवार्य चरणों को दरकिनार कर सीधे पाइप डाले जा रहे हैं, जो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है।


सड़क एवं पुल निर्माण के स्थापित तकनीकी मापदंडों के अनुसार, किसी भी कलवर्ट या पुलिया के निर्माण से पूर्व आधार को समतल कर पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) की एक मजबूत परत बिछाई जानी अनिवार्य होती है। यह आधार न केवल संरचना को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि बरसात के दिनों में पानी के तेज बहाव और ऊपर से गुजरने वाले भारी वाहनों के दबाव को सहने की क्षमता भी देता है। किंतु, शारदा टेकरी के पास चल रहे कार्य में बिना किसी ठोस बेस या पीसीसी के सीधे मिट्टी पर पाइप रखने की बात सामने आ रही है। यदि आधार ही तकनीकी रूप से पुख्ता नहीं होगा, तो पूरी संरचना की स्थिरता संदेह के घेरे में आ जाती है।

क्षेत्र के जागरूक ग्रामीणों ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है और घटिया निर्माण के कारण पहली ही बारिश में पुलिया धंसने या बहने का खतरा बना रहेगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब इसको  प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेजने की तैयारी की जा रही है। यह मांग की जाएगी कि 'गतिशक्ति' जैसे महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान में इस तरह की अनियमितता बरतने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के निगरानी तंत्र को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए तैनात इंजीनियर और विभागीय पर्यवेक्षक इस तरह की चूक को देख क्यों नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि तत्काल इस निर्माण को रोककर मानक अनुरूप कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो वे इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे केंद्रीय आयोग तक ले जाएंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संबंधित मंत्रालय इस पर कब तक लगाम लगाते हैं या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी।

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