जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के स्वास्थ्य महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब फर्जी बिलों के माध्यम से लाखों रुपये के गबन की शिकायतें शासन की चौखट तक जा पहुँचीं। करीब 93 लाख रुपये से अधिक के भुगतान घोटाले की गंभीर शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने रविवार देर रात एक बड़ी दंडात्मक कार्यवाही को अंजाम दिया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल के निर्देशों के परिपालन में कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से उनके पद से निलंबित कर दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सख्त एक्शन के बाद प्रशासन ने विभाग की कमान सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी को सौंप दी है।
कलेक्टर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, डॉ. संजय मिश्रा को निलंबन की अवधि के दौरान उनके वर्तमान दायित्वों से पूर्णतः मुक्त कर दिया गया है और आगामी जांच के लिए उन्हें भोपाल मुख्यालय (संचालनालय) हेतु विमुक्त कर दिया गया है। घोटाले की परतें खुलने के बाद यह माना जा रहा है कि विभाग के भीतर फर्जी देयकों के माध्यम से सरकारी खजाने को बड़ी चपत लगाई गई है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच अब तेज हो गई है। शासन की इस बड़ी कार्यवाही ने प्रशासनिक गलियारों में भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।निलंबन के साथ ही विभाग के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के समस्त दायित्वों का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से सौंप दिया है। डॉ. कोठारी अब राज्य शासन द्वारा नियमित पदस्थापना किए जाने या अगले आदेश तक जिले के स्वास्थ्य विभाग का प्रभार संभालेंगे। प्रशासन के इस कड़े कदम से जहाँ एक ओर विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपी डॉ. संजय मिश्रा को मुख्यालय अटैच किए जाने से विभाग की छवि पर गहरा असर पड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम पर सत्य प्रहार न्यूज़ की नजर बनी हुई है ताकि घोटाले की हर बारीक सच्चाई जनता के सामने आ सके।
रिपोर्ट: अभिलाष शुक्ला, सत्य प्रहार न्यूज़
0 टिप्पणियाँ