डिंडोरी | सत्य प्रहार न्यूज़ रिपोर्टर: अभिलाष शुक्ला डिंडोरी।
जिले में इस वर्ष हुई अल्प वर्षा और आने वाली भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने मध्य प्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूरे डिंडोरी जिले को 'जल अभावग्रस्त क्षेत्र' घोषित कर दिया है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान जिले में पानी के उपयोग और नए बोरिंग खनन को लेकर कड़े नियम लागू रहेंगे।
आदेश की मुख्य बातें: क्या खुला रहेगा और क्या बंद?
नया बोरिंग पूरी तरह प्रतिबंधित: जिले की सीमा के भीतर अब किसी भी निजी नलकूप (Boring) या हैंडपंप का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। विशेष परिस्थितियों में केवल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के बाद ही सीमित कार्य किया जा सकेगा।
पानी के व्यावसायिक उपयोग पर रोक: सार्वजनिक जल स्रोतों (नदी, नाले, तालाब, कुएं) के पानी का उपयोग अब केवल पीने और घरेलू निस्तार के लिए ही किया जा सकेगा। सिंचाई, भवन निर्माण या किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए इन स्रोतों से पानी लेना अब अपराध की श्रेणी में आएगा।
बिजली और डीजल पंप पर पाबंदी: सार्वजनिक जल स्रोतों से बिजली या डीजल पंप के माध्यम से पानी लिफ्ट करना पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है।
पुलिस की रहेगी पैनी नजर: कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि थाना प्रभारियों के माध्यम से क्षेत्रों में निगरानी रखी जाए। यदि कोई व्यक्ति पानी का दुरुपयोग करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ग्रीष्म ऋतु में आम जनता के लिए पेयजल सुरक्षित रखना है। भू-जल स्तर (Ground Water Level) तेजी से नीचे गिरने के कारण भविष्य में पानी का गंभीर संकट न खड़ा हो, इसलिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।
सत्य प्रहार न्यूज़ की अपील: पानी की हर बूंद कीमती है। कृपया प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जल संरक्षण में सहयोग दें।
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