विशेष रिपोर्ट: फर्जी दस्तावेजों के सहारे ली गई पत्रकार अधिमान्यता पर गिरी गाज, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के पत्रकारिता जगत में उस समय हड़कंप मच गया जब जनसंपर्क संचालनालय ने एक कड़ा और बड़ा फैसला सुनाते हुए 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' के भोपाल ब्यूरो चीफ ऋषभ जैन की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। 


शासन द्वारा जारी एक विस्तृत 'स्पीकिंग ऑर्डर' के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई किसी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि बेहद गंभीर आरोपों और फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद की गई है। इस पूरे मामले की जड़ें तब गहरी हुईं जब अरेरा हिल्स थाना प्रभारी और टीकमगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त रिपोर्टों में यह पाया गया कि श्री जैन ने कूटरचित यानी फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर शासन से यह महत्वपूर्ण अधिमान्यता प्राप्त की थी।

​प्रशासनिक जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ऋषभ जैन का पिछला रिकॉर्ड विवादों और कानूनी पचड़ों से भरा रहा है। उनके विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) जैसे गंभीर मामलों सहित कई अन्य आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की पुष्टि हुई है, जिसकी सूचना समय-समय पर पुलिस विभाग द्वारा जनसंपर्क संचालनालय को भेजी गई थी। फरवरी 2026 में उनके खिलाफ दर्ज हुई एक नई एफआईआर ने इस मामले को और भी संगीन बना दिया। विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष अवसर भी दिया था और इसके लिए उन्हें 21 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए, जिससे विभाग के पास नियमों के तहत कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

​नवीन अधिमान्यता नियम 2023 की कंडिका 8(3) का हवाला देते हुए शासन ने साफ कर दिया है कि यदि कोई मीडिया प्रतिनिधि आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है या उसका आचरण संदिग्ध होता है, तो उसकी मान्यता बरकरार नहीं रखी जा सकती। इसी आधार पर अब उनकी अधिमान्यता को समाप्त कर इसकी जानकारी टीकमगढ़ के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित न्यूज़ चैनल के प्रधान संपादक को औपचारिक रूप से भेज दी गई है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो गलत तरीके से पत्रकारिता की साख का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।



अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक शासकीय पत्र और प्राप्त जानकारी पर आधारित है। 'सत्य प्रहार' इस वायरल दस्तावेज़ की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।


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