डिंडोरी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार से शुरू होकर आज गुरुवार को तीसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रही। इस आंदोलन के दौरान डिंडोरी में एक अनोखा और आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे प्रदर्शन को एक अलग दिशा दे दी। अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलित कर्मचारियों ने विरोध जताने के लिए एक बेहद शांतिपूर्ण और अनूठा रास्ता चुना। जिले के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी एक विशाल वटवृक्ष के नीचे इकट्ठा हुए और वहां बैठकर सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ पवित्र रामायण का पाठ शुरू कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने पूरी श्रद्धा से आरती की और भगवान से प्रार्थना की कि शासन की सोच में सकारात्मक बदलाव आए और वह उनकी जायज मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस निर्णय ले। यह शांत और आध्यात्मिक प्रदर्शन आज चर्चा का मुख्य केंद्र बना रहा।
इस आंदोलन और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश उरैती ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी अनदेखी कर रही है। संगठन के अनुसार, कर्मचारियों की मुख्य मांगों में नियमितीकरण की प्रक्रिया को पूरा करना, अन्य राज्यों की तर्ज पर 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ देना और नियमित कर्मचारियों के समान ही महंगाई भत्ता प्रदान करना शामिल है। इसके साथ ही कर्मचारी समूह-सी और समूह-डी कर्मचारियों की तरह स्वास्थ्य बीमा का लाभ और नियमितों के समान अनुकंपा नियुक्ति की सुविधा भी मांग रहे हैं। लंबे समय से सिर्फ आश्वासन मिलने के कारण अब कर्मचारियों के भीतर सरकार की नीतियों के खिलाफ भारी असंतोष पनप चुका है, जिसके चलते वे अब किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
स्थानीय स्तर पर चल रहे इस आंदोलन के बीच संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने अब सीधे सूबे के मुखिया के द्वार पर दस्तक देने की एक बड़ी और निर्णायक रणनीति तैयार कर ली है। संगठन के पदाधिकारियों ने साफ
चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी इन आठ सूत्रीय मांगों पर कोई ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं किया, तो आंदोलन के अगले चरण में आगामी 8 जून को संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी सीधे राजधानी भोपाल पहुंचेंगे और वहां मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) का ऐतिहासिक घेराव करेंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों का स्थाई और संपूर्ण निराकरण नहीं हो जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल और काम बंद आंदोलन इसी तरह पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
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