ब्याज दरों के डर से फीकी पड़ी सोने-चांदी की चमक; सोना ₹2,800 और चांदी ₹5,000 टूटी, जानिए कब, कहां, कैसे, क्यों और किसने बदला बाजार का रुख



कब और कहां हुआ यह बदलाव? घरेलू सर्राफा बाजार में हाल ही के कारोबारी सत्रों (गुरुवार) के दौरान यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मुंबई सहित देश के तमाम बड़े सर्राफा बाजारों में ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन द्वारा जारी आंकड़ों के बाद सोने और चांदी की कीमतों में यह भारी कमी देखने को मिली है।

क्या हुआ और कितनी आई गिरावट? बाजार में बिकवाली के भारी दबाव के बीच सोने और चांदी दोनों के दाम बुरी तरह टूट गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सोने की कीमतों में ₹2,800 की बड़ी गिरावट आई है, जिससे अब इसका भाव ₹1,45,300 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी की चमक भी फीकी पड़ी है और यह ₹5,000 की भारी गिरावट के साथ ₹2,26,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा, एमसीएक्स (MCX) वायदा बाजार में भी अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹32 गिरकर ₹1,41,238 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

क्यों आई यह गिरावट और कैसे बदला माहौल? इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की बैठक के बाद सामने आया हॉकिश (कड़ा) रुख है। फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर रखा जा सकता है। इसके कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल आया और डॉलर इंडेक्स मजबूत हो गया। डॉलर के मजबूत होने और ब्याज दरों के बढ़ने से सोने जैसे बिना ब्याज (नॉन-यील्डिंग) वाले एसेट का आकर्षण कम हो गया। निवेशकों ने अब सुरक्षा (Safe-Haven) के बजाय उन विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है, जहां उन्हें तुरंत ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। इसके चलते गोल्ड ईटीएफ (ETF) से भी लगातार पैसा बाहर निकल रहा है।

किसने प्रभावित किया बाजार को? बाजार के इस पूरे घटनाक्रम को वैश्विक निवेशकों (Global Investors) के बदले रुख और केंद्रीय बैंकों (Central Banks) की नीतियों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। हालांकि, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने साल की पहली तिमाही में करीब 244 टन सोना खरीदकर बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली और ऊंचे लोन रेट्स के डर के आगे यह खरीदारी कम पड़ गई। विश्लेषकों (जैसे आईएनजी इकोनॉमिक्स) का कहना है कि आने वाले समय में भी बाजार पूरी तरह से ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों के इशारे पर ही चलेगा।

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