डिंडौरी जिला मुख्यालय से राजस्व विभाग और प्रशासनिक महकमे को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ नगर और सुबखार क्षेत्र में स्थित करोड़ों रुपए मूल्य की पैतृक जमीन के नामांतरण और उसकी खरीद-बिक्री में एक कथित फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है, जिसके बाद पुलिस ने तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों और सगे रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला करोड़ों रुपए मूल्य की बहुमूल्य पैतृक भूमि के नामांतरण और विक्रय में किए गए कथित फर्जीवाड़े और शासकीय पद के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनकी पैतृक संपत्ति को हड़पने की नीयत से फर्जी वसीयतनामा और फर्जी नोटरी तैयार की गई, जिसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करने का प्रयास किया गया।
कब हुई यह कार्रवाई?
न्यायालयीन और पुलिस कार्रवाई की बात करें तो बुधवार को माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए थे। अदालत के इस आदेश के ठीक अगले ही दिन, यानी गुरुवार को सिटी कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली।
कहाँ का है यह पूरा घटनाक्रम?
फर्जीवाड़े से जुड़ा यह विवादित भूखंड डिंडौरी नगर (विशेषकर वार्ड क्रमांक 4) और उससे लगे सुबखार क्षेत्र में स्थित है। इसमें डिंडौरी नगर की करीब 3.245 हेक्टेयर और सुबखार स्थित 3.545 हेक्टेयर बहुमूल्य पैतृक जमीन शामिल है, जिसकी बाजार में कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है।
कौन-कौन हैं इस मामले में शामिल?
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता डिंडौरी नगर के वार्ड क्रमांक 4 के निवासी इन्द्रपाल सोनपाली उर्फ बबलू हैं। वहीं, न्यायालय के निर्देश पर जिन लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है, उनमें पीड़ित के सगे चाचा नंदलाल सोनपाली, चचेरे भाई रोहित सोनपाली, तत्कालीन पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे शामिल हैं। सिटी कोतवाली निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे के नेतृत्व में पुलिस इस मामले की विवेचना कर रही है।
कैसे और क्यों दिया गया इस साजिश को अंजाम?
शिकायत के अनुसार, पीड़ित इन्द्रपाल सोनपाली के दादा स्वर्गीय बालमुकुंद सोनपाली की मृत्यु के बाद से ही इस पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार में लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। इस पूरी चल-अचल संपत्ति के संबंध में एक दीवानी प्रकरण और अपील वर्ष 2006 से ही माननीय हाई कोर्ट में भी लंबित है।
आरोप है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद, साल 2022 में पीड़ित के सगे चाचा और चचेरे भाई ने कथित तौर पर एक जाली वसीयतनामा तैयार किया, जिसे स्वर्गीय दादी के नाम पर दर्शाया गया। इस कथित फर्जी वसीयत के आधार पर जमीन का नामांतरण अपने नाम कराने का खेल शुरू हुआ। आरोप है कि इस प्रक्रिया में तत्कालीन पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे ने नियमों को ताक पर रखकर अपने शासकीय पद का दुरुपयोग किया और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर की।
साजिश को पुख्ता करने के लिए पीड़ित के फर्जी हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र तैयार करवा लिए गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि इन्द्रपाल को इस नामांतरण से कोई आपत्ति नहीं है। जबकि पीड़ित का साफ कहना है कि उन्हें राजस्व विभाग से कभी कोई नोटिस मिला ही नहीं। इसके अलावा, पीड़ित की मां जो साल 2021 से डिंडौरी आई ही नहीं और पंजाब में रह रही हैं, आरोपियों ने कथित तौर पर मां-बेटे दोनों की फर्जी नोटरी तक तैयार करवाकर सरकारी दस्तावेजों में शामिल कर दी।
आगे की वैधानिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) सहित अन्य आवश्यक धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही माननीय न्यायालय के समक्ष विस्तृत चार्जशीट पेश की जाएगी। अदालत के इस कड़े रुख के बाद क्षेत्र के भू-माफियाओं और नियमों को ताक पर रखने वाले अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है।
कानूनी डिस्क्लेमर (Legal Disclaimer)
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस आलेख में प्रकाशित तमाम जानकारी न्यायालय द्वारा दिए गए आधिकारिक निर्देशों, सिटी कोतवाली पुलिस डिंडौरी में दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) और संबंधित पक्षों द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए परिवाद व आरोपों पर आधारित है। SATYA PRAHAR NEWS किसी भी व्यक्ति, पदाधिकारी या लोक सेवक पर सीधे तौर पर दोषारोपण नहीं करता है और न ही किसी की सामाजिक छवि को प्रभावित करने का उद्देश्य रखता है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और वैधानिक जांच पुलिस प्रशासन और माननीय न्यायालय के अधीन है, और कानून के तहत ही अंतिम निर्णय मान्य होगा। हमारा उद्देश्य केवल प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक जागरूकता के तहत निष्पक्ष समाचार पाठकों तक पहुंचाना है।
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