नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए डिण्डौरी जिले की नगर परिषद शहपुरा की मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) सुश्री रीना सिंह राठौर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। कमिश्नर संकेत भोंडवे द्वारा 25 जून 2026 को जारी इस कड़े निलंबन आदेश से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोपों से घिरी इस विवादित अधिकारी को पिछले हफ्ते ही डिण्डौरी का प्रभार सौंपा गया था, लेकिन पद संभालते ही शहपुरा में इनके कारनामों का घड़ा फूट गया और शासन ने इन्हें तत्काल पद से हटा दिया।
शहपुरा नगर परिषद की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी अरुण अग्रवाल द्वारा शासन से की गई लिखित शिकायत के बाद यह पूरी गाज गिरी है। दरअसल, सुश्री रीना सिंह राठौर पर आरोप है कि उन्होंने नगर परिषद में नियम विरुद्ध तरीके से जेम (GeM) पोर्टल और ऑफलाइन माध्यम से अपने पसंदीदा ठेकेदारों से ऊंचे दामों पर सामग्री क्रय की और कोटेशन के जरिए मनमाने निर्माण कार्य कराकर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई। इसके अलावा, बिना सक्षम स्वीकृति के नगर के एमआरएफ सेंटर में टीन शेड का निर्माण कराने, परिषद को भ्रमित कर अपने पसंदीदा एनजीओ को बिना कार्य किए हर महीने लगभग दो लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाने और सबसे गंभीर रूप से 'जल गंगा संवर्धन योजना' के अंतर्गत नगर में फर्जी वॉटर हार्वेस्टिंग का निर्माण दिखाकर शासकीय राशि का खुलेआम दुरूपयोग करने के संगीन मामले जांच में सही पाए गए हैं।
अध्यक्ष की शिकायत के बाद संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन विकास, संभाग-जबलपुर द्वारा 19 मई 2026 को एक 3-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसने 16 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट संचालनालय को सौंपी। इस जांच प्रतिवेदन में स्वागत गेट की वास्तविक लागत से अधिक का बिल निकालने, बिना अनुमति के किराये पर वाहन लगाने और मानस भवन की दुकानों की नीलामी में गंभीर वित्तीय हेराफेरी की पुष्टि हुई है। रीना सिंह राठौर अपनी मनमानी करते हुए बिना अध्यक्ष की अनुमति के परिषद की बैठकें आयोजित करती थीं और जनप्रतिनिधियों को धोखे में रखकर फाइलों पर हस्ताक्षर करा लेती थीं। साथ ही, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से उनका व्यवहार बेहद अभद्र रहता था, जिससे क्षेत्र में परिषद की छवि लगातार धूमिल हो रही थी।
नगरीय प्रशासन विभाग के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सुश्री राठौर पूर्व में जहां-जहां भी पदस्थ रही हैं, वहां-वहां उनके द्वारा भारी अनियमितताएं की जाती रही हैं और वे आर्थिक गबन करने की आदी हो चुकी हैं। वर्तमान में उनके खिलाफ चंदेरी, ब्यौहारी, नौरोजाबाद और चंदिया नगर परिषदों में वित्तीय घोटालों, गुणवत्ताविहीन सड़क निर्माण और मोबाइल टॉयलेट खरीदी में हेरफेर को लेकर 4 अलग-अलग विभागीय जांचें चल रही हैं, जिसमें ब्यौहारी का मामला लोकायुक्त में भी दर्ज है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश शासन द्वारा नगर परिषद चंदिया के एक आपराधिक प्रकरण क्रमांक 228/2019 में इनके खिलाफ कोर्ट में अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी भी दी जा चुकी है।
तमाम शिकायतों और भ्रष्टाचार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए राज्य शासन ने सुश्री रीना सिंह राठौर के इस कृत्य को पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, घोर अनुशासनहीनता और शासन के प्रति संदिग्ध निष्ठा का प्रतीक माना है। इसी के चलते मध्य प्रदेश नगरपालिका सेवा नियम, 1973 के प्रावधानों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की इस अवधि में इनका मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास (यांत्रिकी प्रकोष्ठ), संभाग-जबलपुर नियत किया गया है और उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा। सत्य प्रहार न्यूज़ इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
0 टिप्पणियाँ