मानसून से निपटने के लिए डिंडौरी जिला प्रशासन मुस्तैद, बाढ़ और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की हुई बड़ी समीक्षा
आगामी वर्षा ऋतु और मानसून के दौरान संभावित बाढ़ की विभीषिकाओं को देखते हुए डिंडौरी जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। कलेक्टर कार्यालय में आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुख्य रूप से जिले के बाढ़ प्रभावित और बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई, साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बनाए गए रेस्क्यू प्लान को अंतिम रूप दिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक के दौरान जिले के सभी छोटे-बड़े बांधों के जलभराव के स्तर और उनकी अधिकतम क्षमता की समीक्षा की। इस बात पर विशेष रणनीति बनाई गई कि यदि भारी बारिश के कारण बांधों के गेट खोलने पड़ते हैं, तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को कैसे सुरक्षित निकाला जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुराने अनुभवों से सीखते हुए संभावित बाढ़ के कारणों का बारीकी से अध्ययन करें और समय रहते सारे इंतजाम पूरे कर लें।
प्रशासन का सबसे ज्यादा जोर इस बात पर रहा कि आपदा के समय आम जनता तक सूचनाएं पहुंचने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए चेतावनी तंत्र यानी अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही आपातकालीन स्थितियों के लिए जरूरी राशन, दवाइयां, शुद्ध पेयजल, डॉक्टरों की टीम और पशु चिकित्सा सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बाढ़ के समय महामारियों को फैलने से रोका जा सके।
बैठक में अस्थाई राहत शिविर बनाने, जर्जर और खतरनाक मकानों को चिन्हित कर उन्हें खाली कराने तथा जिला स्तर पर एक सक्रिय आपदा नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) को चौबीस घंटे चालू रखने की बात कही गई। इसके अलावा बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाली नावों, LF जैकेट और अन्य उपकरणों की भी जांच की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी, डिप्टी कलेक्टर श्री वैधनाथ वासनिक, संयुक्त कलेक्टर सुश्री भारती मेरावी सहित तहसीलदारों और अन्य सभी संबंधित विभागों के जिला प्रमुख मुख्य रूप से मौजूद रहे।
श्रमोदय आदर्श आईटीआई भोपाल में निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया शुरू, 30 जून तक कराएं पंजीयन
मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। भोपाल स्थित श्रमोदय आदर्श आईटीआई में वर्ष 2026 के सत्र के लिए प्रवेश की पंजीयन प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। इस संस्थान में भारत सरकार के एनसीवीटी से मान्यता प्राप्त विभिन्न तकनीकी और आधुनिक ट्रेडों में विद्यार्थियों को पूरी तरह निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रवेश लेने के इच्छुक योग्य अभ्यर्थी 26 मई से लेकर 30 जून 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन करने की इसी तय समयावधि के दौरान छात्रों को चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने के लिए 8वीं और 10वीं कक्षा उत्तीर्ण छात्र संस्थान में उपलब्ध आठ अलग-अलग ट्रेडों में प्रवेश पाने के पात्र माने जाएंगे।
संस्थान में वर्तमान समय की मांग को देखते हुए इलेक्ट्रीशियन, टेक्नीशियन मेकाट्रोनिक्स, एडवांस सीएनसी मशीनिंग टेक्नीशियन, सिविल इंजीनियर असिस्टेंट, वेल्डर, आईओटी (स्मार्ट सिटी), फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी और इंटीरियर डिजाइन एंड डेकोरेशन जैसे महत्वपूर्ण कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी विषयों में निर्धारित सीटों के मुताबिक केवल मेरिट के आधार पर ही छात्र-छात्राओं को दाखिला मिलेगा।
जो भी छात्र इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे अपने सबसे नजदीकी कियोस्क सेंटर पर जाकर पंजीयन और चॉइस फिलिंग का काम आसानी से पूरा करा सकते हैं। इस प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और विस्तृत जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dsd.mp.gov.in का अवलोकन किया जा सकता है। संस्था प्रबंधन ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने का अनुरोध किया है ताकि वे अपनी पसंद के विषय में पढ़ाई कर सकें। इसके अलावा किसी भी तरह की पूछताछ या फॉर्म भरने में आ रही असुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 9424454453 और 9826947798 पर सीधे संपर्क किया जा सकता है।
डिंडौरी में उर्वरक बिक्री की कड़ाई से होगी निगरानी, दो कृषि अधिकारियों की लगी विशेष ड्यूटी
जिले के किसान भाइयों को खेती-किसानी के सीजन में समय पर खाद और उर्वरक मिल सके, इसके लिए कृषि विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। उर्वरक वितरण की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, साफ-सुथरा और सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से डिंडौरी में विशेष निगरानी तंत्र लागू कर दिया गया है। उप संचालक कृषि द्वारा जारी किए गए नए आदेश के मुताबिक, ई-विकास पोर्टल की हर दिन समीक्षा करने और खाद बिक्री से जुड़ी किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान करने के लिए दो समर्पित अधिकारियों की तैनाती की गई है।
मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए जिले में खाद की उपलब्धता पर पैनी नजर रखी जाएगी। साथ ही सहकारी और निजी केंद्रों पर ई-पॉस मशीन या पोर्टल चलाने में आने वाली किसी भी तकनीकी दिक्कत को तुरंत दूर किया जाएगा। आदेश के तहत कृषि विकास अधिकारी रविन्द्र कुमार गुप्ता और कृषि विस्तार अधिकारी आकांक्षा सिंह उइके को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये दोनों अधिकारी प्रतिदिन पोर्टल का डेटा चेक कर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजेंगे।
उप संचालक कृषि ने दोनों अधिकारियों को पूरी ईमानदारी और गंभीरता से फील्ड पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वितरण केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या कमी दिखने पर तुरंत सूचित करें ताकि समय रहते कदम उठाया जा सके और हमारे किसानों को कतारों में न लगना पड़े। विभाग को पूरा भरोसा है कि इस नई व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और किसानों को सही समय पर जरूरत की चीजें मिलेंगी।
खाद वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू, विकासखंडवार नोडल अफसर तैनात
किसानों को समितियों के चक्कर काटने से बचाने और खाद की आपूर्ति को बेहद सरल एवं किसान-हितैषी बनाने के लिए डिंडौरी जिले में एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने जिले के सभी विकासखंडों में विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्तियां कर दी हैं। ये अधिकारी ई-विकास पोर्टल के माध्यम से चलाई जा रही नई ई-टोकन व्यवस्था की कमान संभालेंगे और जमीनी स्तर पर आने वाली बाधाओं को दूर करेंगे।
विभागीय जानकारी के मुताबिक, जिले में बीते 1 अप्रैल 2026 से ही 'ई-विकास वितरण एवं कृषि आदान समाधान प्रणाली' पूरी तरह से लागू है। इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत किसानों को लाइन में लगने की बजाय ई-टोकन जारी किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी बारी पर आसानी से खाद मिल जाती है। इसी पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने और ग्रामीण इलाकों में तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए ब्लॉक स्तर पर अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है।
ये नियुक्त नोडल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में उर्वरक वितरण, समय पर टोकन जनरेट करने और पोर्टल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे। इनका मुख्य काम किसानों, सहकारी समितियों और निजी उर्वरक दुकानदारों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा। इन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि फील्ड पर कोई तकनीकी खराबी आती है या प्रशासनिक दिक्कत होती है, तो वे तुरंत अपने सीनियर अफसरों को बताएंगे ताकि काम प्रभावित न हो।
इसके साथ ही ये अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करेंगे और बीज, खाद तथा कीटनाशक बेचने वाली दुकानों का औचक निरीक्षण भी करेंगे। ई-विकास प्रणाली से जुड़ी किसी भी किसान की शिकायत का मौके पर ही निपटारा किया जाएगा। कृषि विभाग का मानना है कि इस जमीनी तैनाती से ई-टोकन व्यवस्था बेहद मजबूत होगी और पूरी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। यह आदेश पूरे जिले में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

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