डिंडोरी (शहपुरा)। शहपुरा नगर परिषद में गुरुवार को आयोजित होने वाली परिषद की विशेष बैठक प्रक्रियात्मक मतभेदों और वैधानिक व्याख्याओं के चलते संपन्न नहीं हो सकी। नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) रीना राठौर पर स्थापित नियमों और परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए बैठक का विरोध किया। दूसरी ओर, सीएमओ रीना राठौर ने इन आरोपों को सही न मानते हुए पूरे घटनाक्रम को मनोनीत पार्षदों के लिखित अनुरोध पर की गई नियमानुसार कार्रवाई बताया है। दोनों पक्षों के बीच उपजे इस प्रक्रियात्मक गतिरोध के कारण आखिरकार बैठक को स्थगित करना पड़ा।
अध्यक्ष का मत: नगर पालिका अधिनियम की धारा 51 के उल्लंघन का आरोप नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल ने इस प्रशासनिक प्रक्रिया पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा उनसे बिना किसी पूर्व परामर्श, चर्चा या सहमति के सीधे पार्षदों को दूरभाष पर सूचित कर बैठक आयोजित कर दी गई। अध्यक्ष के अनुसार, यह कार्यप्रणाली नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 51 के स्थापित प्रावधानों के सर्वथा विपरीत है, जो कि नगरीय निकाय के सुचारू संचालन के नियमों को परिभाषित करती है। इसके साथ ही उन्होंने सीएमओ पर पूर्व में किए गए पत्राचार का उचित जवाब न देने का भी आरोप लगाया है। अध्यक्ष ने इस संपूर्ण प्रशासनिक स्थिति और नियमों की कथित अनदेखी के संबंध में जिला कलेक्टर एवं विभागीय संचालक को विधिवत पत्र प्रेषित कर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
मुख्य नगरपालिका अधिकारी का पक्ष: मनोनीत पार्षदों के अधिकार और एजेंडे पर दी सफाई इस पूरे विषय पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) रीना राठौर ने अध्यक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि शासन द्वारा नगर परिषद में मनोनीत किए गए चार पार्षदों—रामलाल रजक, राजेश साहू, हारून मंसूरी और मनोज सोनी—की ओर से गत 28 मई को एक आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ था। इस पत्र में मनोनीत पार्षदों ने उल्लेख किया था कि उनकी नियुक्ति को एक माह का समय बीत चुका है, किंतु अब तक उन्हें नगर विकास के महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ है, अतः परिषद की बैठक आहूत की जाए।
सीएमओ के अनुसार, इसी वैधानिक अनुरोध को आधार बनाकर 2 जून को नगर परिषद अध्यक्ष सहित सभी पार्षदों को बैठक का एजेंडा प्रेषित किया गया था। इस कार्यसूची में मुख्य रूप से शहर के विकास से जुड़े मुद्दे जैसे—रोड डिवाइडर का निर्माण, विद्युत पोल व स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, तथा सड़क निर्माण कार्य की दरों का अनुमोदन शामिल था। सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त पत्र पर स्वयं अध्यक्ष ने सड़क एवं नाली निर्माण के खुले टेंडरों को इसी बैठक में सम्मिलित करने का लिखित निर्देश अंकित किया था, जिसका आदर करते हुए उन विषयों को भी एजेंडे में जोड़ लिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया को लेकर कोई मतभेद था या बैठक स्थगित करनी थी, तो उन्हें सीधे तौर पर सूचित किया जा सकता था।
मनोनीत पार्षदों का वक्तव्य: क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए आवश्यक थी बैठक इस प्रक्रियात्मक गतिरोध पर अपनी बात रखते हुए मनोनीत पार्षद रामलाल रजक ने बताया कि शासन स्तर से एक माह पूर्व उनकी नियुक्ति की जा चुकी है, परंतु प्रक्रियात्मक कारणों से वे अब तक परिषद की किसी भी औपचारिक बैठक का हिस्सा नहीं बन सके हैं। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में वे केवल वार्डों और नगर के विकास कार्यों को लेकर परिषद के पटल पर अपनी बात रखना चाहते थे, इसी उद्देश्य से उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी को पत्र लिखकर बैठक आयोजित करने का सामूहिक आग्रह किया था।
बहरहाल, स्थानीय प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के बीच उपजे इस प्रक्रियात्मक और वैधानिक मतभेद के कारण नगर विकास के कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय होना फिलहाल टल गया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद शहपुरा नगर परिषद की आगामी बैठक कब और किन परिस्थितियों में संपन्न होती है।
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