डिंडौरी पुलिस के 'वार्षिक निरीक्षण' में पहुंचे IG ललित शाक्यवार, कानून व्यवस्था को लेकर दिए सख्त निर्देश; जानें सम्मेलन की बड़ी बातें

जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, अलर्ट और परिणाममुखी बनाने के उद्देश्य से पुलिस मैदान में एक दिवसीय भव्य जिला स्तरीय पुलिस सम्मेलन और वार्षिक निरीक्षण का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में मुख्य रूप से बालाघाट रेंज के आईजी ललित शाक्यवार शामिल हुए, जिनकी उपस्थिति में डिंडौरी पुलिस की आगामी कार्ययोजना और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई। सम्मेलन में जिले के पुलिस अधीक्षक आशीष खरे, एडिशनल एसपी, एसडीओपी सतीश द्विवेदी, शहपुरा एसडीओपी अजय तिवारी और बजाग एसडीओपी विवेक गौतम सहित तमाम पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी एवं विवेचना अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस दौरान अधिकारियों ने अपने मैदानी अनुभव साझा किए और पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी रखे।

मीडिया से चर्चा करते हुए अपने वक्तव्य में आईजी ललित शाक्यवार ने स्पष्ट किया कि बालाघाट ज़ोन के अंतर्गत डिंडौरी एक बेहद खास और महत्वपूर्ण जिला है। उन्होंने बताया कि इस वार्षिक निरीक्षण की एक स्थापित परंपरा रही है, जिसके तहत पुलिस लाइन में जवानों की परेड, उनकी शारीरिक व मानसिक सेहत, गाड़ियों के रख-रखाव और एमटी शाखा की स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। आईजी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शारीरिक रूप से फिट, स्वस्थ और मानसिक रूप से खुश रहेंगे, तभी फील्ड में उनके काम के परिणाम भी बेहतर और जनता के अनुकूल प्राप्त होंगे। निरीक्षण के इसी क्रम में आरआई ऑफिस, एसपी ऑफिस, एसडीओपी कार्यालयों और विभिन्न थानों के कामकाज की भी बारीकी से समीक्षा की जा रही है।

जवानों और अधिकारियों की आंतरिक समस्याओं को लेकर आईजी ने बताया कि सम्मेलन के दौरान एक विशेष चिंता दरबार का आयोजन भी किया गया था, जिसमें पुलिसकर्मियों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याएं और विभाग को सुदृढ़ बनाने के लिए कई अच्छे सुझाव सामने रखे, जिनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कड़े लहजे में निर्देश दिए कि नए बने कानूनों के परिप्रेक्ष्य में सभी थाना प्रभारियों और सुपरवाइजरी अधिकारियों की प्रोफेशनल कॉम्पिटेंसी यानी तकनीकी और विधिक दक्षता पूरी होनी चाहिए। अधिकारियों को थानों का औचक निरीक्षण करने और वहां पाई जाने वाली कमियों का तत्काल मौके पर ही सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनी रहे।

सम्मेलन के मुख्य एजेंडे पर बात करते हुए आईजी ने कहा कि सड़क पर पुलिस की मौजूदगी का असली मकसद सिर्फ अपराधियों पर दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि


समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखना, कानून का पालन सुनिश्चित करना और आम जनता के भीतर सुरक्षा और अटूट विश्वास का माहौल निर्मित करना है। लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए उन्होंने साक्ष्य संकलन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, साइबर अपराधों की बारीकी से जांच, महिला एवं बाल अपराधों में बिना देरी किए त्वरित कार्रवाई करने तथा न्यायालयीन मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने, फरार आरोपियों की धरपकड़ तेज करने, नशे के अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने और जनता से पुलिस के संपर्क को और मजबूत करने जैसे विभिन्न गंभीर विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया गया। पीएचक्यू स्तर से मिले निर्देशों और डीजीपी साहब के आदेशों का जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के लिए इस निरीक्षण के ठीक बाद एक विस्तृत क्राइम समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई है, जिससे डिंडौरी जिले की कानून व्यवस्था को एक नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

- सत्य प्रहार न्यूज़ के लिए डिंडौरी से अभिलाष शुक्ला की विशेष रिपोर्ट

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