जुनवानी में जल निगम की बड़ी लापरवाही: भ्रष्टाचार?? की नींव पर खड़ी हो रही 'मौत की टंकी'

 



डिंडौरी। कहा जाता है कि गरीब की जान की कीमत कुछ नहीं होती और डिंडौरी के जुनवानी गांव में जल निगम द्वारा बनाई जा रही पानी की टंकी को देखकर यह कहावत आज पूरी तरह चरितार्थ होती दिख रही है। विकास के नाम पर जनता के टैक्स के पैसों के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ निर्माण की गुणवत्ता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। पता चला है कि जयपुर के मुख्य ठेकेदार ने इस काम को ऋषिराज नामक एक पेटी कॉन्ट्रैक्टर को सौंप दिया है। ग्राउंड जीरो पर 'सत्य प्रहार' की पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद डरावने और चौंकाने वाले हैं।

यहाँ निर्माण में कथित तौर पर जंग लगे सरिए और एक्सपायरी डेट वाली सीमेंट का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। नियमानुसार सीमेंट की वैधता मैन्युफैक्चरिंग तारीख से केवल 3 महीने की होती है, लेकिन यहाँ मौके पर मौजूद सीमेंट की बोरियों से मैन्युफैक्चरिंग डेट ही मिटा दी गई है, जो सीधे तौर पर एक बड़ी धांधली की ओर इशारा करती है। हद तो तब हो गई जब इस गंभीर मामले पर उक्त पेटी कॉन्ट्रैक्टर ऋषिराज से फोन पर बात की गई, तो उसने बड़ी ही बेरुखी और गैर-जिम्मेदाराना लहजे में कहा कि "हमें क्या है, हम तो काम करके निकल जाएंगे, उसके बाद कंपनी जाने और विभाग जाने।" यह एक बयान यह बताने के लिए काफी है कि जिम्मेदारियों से कैसे पल्ला झाड़ा जा रहा है और जनता की जान की ठेकेदार की नजर में क्या कीमत है।

नियमों की अनदेखी यहीं खत्म नहीं होती। सरकारी प्रावधानों के अनुसार निर्माण स्थल पर एक सूचना बोर्ड होना अनिवार्य है, जिसमें प्रोजेक्ट की लागत, ठेकेदार का नाम और कार्यवधि का उल्लेख हो, लेकिन यहाँ ऐसा कोई बोर्ड नजर नहीं आता। मुख्य मार्ग से महज 10 मीटर की दूरी पर बन रही इस टंकी की न तो घेराबंदी की गई है और न ही यहाँ काम कर रहे मजदूरों के पास सुरक्षा के लिए हेलमेट जैसे कोई उपकरण हैं। सड़क के इतने करीब बिना किसी सुरक्षा मानकों के हो रहा यह निर्माण कभी भी किसी राहगीर, ग्रामीण या खेलते हुए मासूम बच्चे के लिए काल बन सकता है।

हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले के जिम्मेदार अधिकारी मंडला में बैठकर चैन की नींद सो रहे हैं और उन्हें धरातल पर हो रही इस असुरक्षित कार्यशैली की खबर तक नहीं है। गाँव में पेसा एक्ट लागू होने के बावजूद ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों को शायद इन नियमों की सही जानकारी नहीं है, वरना उनकी नाक के नीचे नियमों की ऐसी धज्जियाँ नहीं उड़ाई जातीं। हालांकि, 'सत्य प्रहार' द्वारा पंचायत और पुलिस प्रशासन को जगाने के बाद उन्होंने तुरंत कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई कोई ठोस जांच होगी या फिर भ्रष्टाचार की इस जर्जर टंकी को प्यास बुझाने के नाम पर जनता के सिर पर मढ़ दिया जाएगा।

डिंडौरी से सत्य प्रहार के लिए अभिलाष शुक्ला की रिपोर्ट।

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