डिंडौरी: जिले की कमान संभाल रहीं कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया की दूरदर्शी सोच और कुशल प्रशासनिक नेतृत्व का परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। उनके विशेष मार्गदर्शन में संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत डिंडौरी जिले ने पेयजल गुणवत्ता परीक्षण के क्षेत्र में मिसाल पेश की है। बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर के निर्देशों पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जिले के शासकीय स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक मुहिम छेड़ दी है, जिसके सकारात्मक परिणाम आंकड़ों में भी साफ झलक रहे हैं।
कलेक्टर की सतत मॉनिटरिंग और मैदानी अमले को दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के चलते विभाग ने अब तक 3032 के कुल लक्ष्य के सापेक्ष 2628 लक्ष्यों को पूरा कर लिया है। जिले ने 86.67 प्रतिशत की यह शानदार उपलब्धि हासिल कर राज्य स्तर पर अपनी सक्रियता दर्ज कराई है। श्रीमती भदौरिया ने इस अभियान को केवल एक शासकीय कार्य न मानकर इसे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ा है। उनके नेतृत्व में पीएचई विभाग की टीमों ने रिकॉर्ड समय में 1508 स्कूलों और 1081 आंगनबाड़ी केंद्रों के जल स्रोतों की बारीकी से जांच की है, ताकि नौनिहालों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके।
प्रशासनिक कार्यकुशलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि केवल जांच ही नहीं, बल्कि जल प्रबंधन को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने हेतु पंप ऑपरेटरों के प्रशिक्षण में भी लक्ष्य से अधिक काम हुआ है। 37 पंप ऑपरेटरों के लक्ष्य के मुकाबले 39 को प्रशिक्षित करना कलेक्टर की उस कार्यशैली को दर्शाता है जहाँ हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दिया जाता है। जिले की इस सफलता पर प्रशासनिक हलकों में सराहना हो रही है, वहीं शेष बचे लक्ष्यों को भी जल्द पूरा करने के लिए टीम भावना के साथ कार्य जारी है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के इस नेतृत्व ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो जल संवर्धन और जन स्वास्थ्य जैसे कठिन लक्ष्यों को भी सुगमता से हासिल किया जा सकता है।
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