डिंडौरी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में इन दिनों एक नई सख्ती देखने को मिल रही है जहाँ शासकीय कार्यों में ढिलाई बरतने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है। जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के दो अलग-अलग क्षेत्रों के पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई ने न केवल राजस्व विभाग के अमले को चौंका दिया है बल्कि उन कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश जारी किया है जो अपने दायित्वों के प्रति सजग नहीं हैं। जिले में राजस्व अभिलेखों के संधारण और उनके डिजिटाइजेशन को लेकर चल रही इस मुहिम ने अब एक नया मोड़ ले लिया है जहाँ गुणवत्ता से समझौता करना भारी पड़ता दिख रहा है।
पहली बड़ी कार्रवाई तहसील बजाग के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुकुलपुरा हल्का नंबर 169 में देखने को मिली जहाँ तैनात पटवारी श्री राजेश कुमार पर निलंबन की गाज गिरी है। प्रशासन की टीम द्वारा यहाँ गुणवत्ता आश्वासन यानी क्यूए की विशेष जांच की गई थी जिसमें फॉर्म 438 के पांच प्रमुख बिंदुओं के आधार पर कार्यों का मूल्यांकन किया गया। इस सूक्ष्म जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पटवारी द्वारा भूमि अभिलेखों को अपडेट करने में गंभीर कोताही बरती गई थी। रिकॉर्ड संधारण में पाई गई इसी लापरवाही को आधार मानकर कलेक्टर ने उन्हें पद से हटाते हुए निलंबन अवधि के लिए उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय बजाग निर्धारित कर दिया है।
कार्रवाई का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका क्योंकि तहसील डिंडौरी के नेवसा क्षेत्र में भी प्रशासनिक चाबुक चला है। यहाँ के ग्राम पौंडी माल हल्का नंबर 53 की पटवारी सुश्री शारदा पारधी को भी उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में बेस रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन के दौरान की गई जांच में भारी अनियमितताएं और रिकॉर्ड का अपडेट न होना पाया गया। वर्तमान समय में जब सरकार शत-प्रतिशत डिजिटल रिकॉर्ड पर जोर दे रही है तब इस प्रकार की लापरवाही को कलेक्टर ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के विरुद्ध माना। सुश्री शारदा पारधी को अब निलंबन अवधि के दौरान तहसील कार्यालय डिंडौरी में अपनी उपस्थिति देनी होगी जहाँ उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के इस कड़े रुख ने पूरे जिले के राजस्व विभाग में खलबली मचा दी है। यह स्पष्ट हो चुका है कि शासन की योजनाओं और जनता के जमीनी रिकॉर्ड के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डिजिटाइजेशन की इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अब हर स्तर पर निगरानी कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कार्रवाई का असर बाकी कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर किस प्रकार पड़ता है लेकिन फिलहाल डिंडौरी प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि कर्तव्यों में कोताही का अंजाम सिर्फ और सिर्फ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई ही होगा।
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