ग्रामीणों ने कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके गांवों में कागजों पर तो नल-जल योजना संचालित है और बड़े-बड़े बोर्ड भी लगे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। कहीं पाइपलाइन आज भी आधी-अधूरी पड़ी है तो कहीं नलों के कनेक्शन तो दे दिए गए हैं लेकिन उनमें पानी की एक बूंद तक नहीं आती। आलम यह है कि भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी संकट मंडरा रहा है। महिलाओं ने खाली बर्तन दिखाकर प्रशासन को यह अहसास कराया कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं धरातल पर किस कदर दम तोड़ रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए और ग्रामीणों की परेशानी को समझते हुए कलेक्टर ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर ही मौजूद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यपालन यंत्री (EE) को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि इन दोनों गांवों की पानी की समस्या का तुरंत निराकरण किया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जिले में जहां भी इस तरह की समस्याएं हैं, उन गांवों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए ताकि आने वाले समय में भीषण गर्मी के दौरान ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
कलेक्टर कार्यालय से उम्मीद की एक नई किरण लेकर लौट रही इन महिलाओं की आस अब पूरी तरह से प्रशासनिक आदेश के पालन पर टिकी है। सत्य प्रहार न्यूज की नजर इस पूरी खबर पर तब तक मुस्तैदी से बनी रहेगी जब तक कि जलगुड़ा और चौबीसा के ग्रामीणों के नलों में साफ पानी नहीं पहुंच जाता। इस मामले की अगली कड़ी में हम स्वयं पीएचई के ईई से मुलाकात करेंगे और उनसे यह विस्तार से जानेंगे कि कलेक्टर के निर्देशों के बाद उन्होंने धरातल पर क्या ठोस कार्यवाही की है और कब तक इन गांवों की प्यास बुझेगी। खबर के अगले भाग और ताज़ा अपडेट के लिए निरंतर जुड़े रहें सत्य प्रहार न्यूज के साथ।
रिपोर्ट: अभिलाष शुक्ला, सत्य प्रहार न्यूज, डिंडौरी
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