डिंडोरी (सत्य प्रहार न्यूज़): मध्य प्रदेश में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का अपनी नियमितीकरण और समान वेतन की मांगों को लेकर जारी आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को डिंडोरी जिले के दर्जनों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कलेक्टरेट परिसर में एकत्रित होकर अपनी मांगों के समर्थन में जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि के रूप में डिंडोरी तहसीलदार शशांक शेंडे ने इस ज्ञापन को स्वीकार किया और कर्मचारियों की मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। ज्ञापन सौंपने पहुंचे कर्मचारियों ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें समय रहते पूरी नहीं की गईं, तो पूरे जिले की चिकित्सा और स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो जाएगी।
इस आंदोलन की बुनियाद पिछले आठ वर्षों के लंबे संघर्ष पर टिकी हुई है, जहां जिले के लगभग 512 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी कर्मचारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें मंच से और व्यक्तिगत भेंट के दौरान कई बार आश्वस्त किया था। शासन के स्तर पर इसके लिए नीतिसंगत नियम भी बनाए गए थे, परंतु यह अत्यंत खेद का विषय है कि उन नीतियों को अब तक धरातल पर पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों में शासन की वादाखिलाफी को लेकर तीव्र असंतोष व्याप्त है।
इस आंदोलन की गंभीरता और इसके व्यापक प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे जिले के सभी सात ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले 2519 आरोग्य केंद्र, 219 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC), 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का कार्य पूरी तरह ठप हो सकता है। इस राष्ट्रव्यापी एवं प्रांतीय आह्वान के समर्थन में एएनएम, सीएचओ, कंसलटेंट, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, बीसीएम, बीपीएम, फार्मासिस्ट, राष्ट्रीय प्रोग्राम कंसलटेंट, डीडीसी सपोर्ट स्टाफ, एनआरसी एफडी और आरबीएसके के डॉक्टर्स समेत सभी एनएचएम कर्मचारी एकजुट हैं। इन सभी का संकल्प है कि अब यह लड़ाई आर-पार के मुकाम पर पहुंच चुकी है और बिना किसी ठोस परिणाम के वे पीछे नहीं हटेंगे।
विषय की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, डिंडोरी के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश उरैती ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने भी हमें आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा व्यतीत हो जाने के बाद भी हमारी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब हमारे पास संघर्ष के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं बचा है, और यदि सरकार हमारी न्यायसंगत मांगों की अनदेखी करती है, तो हम आगामी दिनों में पूर्ण रूप से कार्य बंद कर हड़ताल पर जाने के लिए विवश होंगे।
अपनी रणनीति को रेखांकित करते हुए संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का खाका प्रस्तुत किया है, जिसके तहत आगामी 2 जून से ही सभी प्रकार के शासकीय कार्यों का पूर्ण रूप से ऑनलाइन और ऑफलाइन बहिष्कार कर दिया जाएगा। इसके पश्चात भी यदि प्रशासन और सरकार द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाता है, तो आगामी 8 जून को जिले के समस्त कर्मचारी भोपाल कूच करेंगे और वहां मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) का घेराव करेंगे। इस कड़े निर्णय से जिले के सभी 7 ब्लॉकों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाने की ठोस संभावना जताई जा रही है, जिसकी समस्त उत्तरदायित्व प्रशासन और शासन का होगा। अब देखना यह होगा कि इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन क्या सुधारात्मक कदम उठाता है।
डिंडोरी से सत्य प्रहार न्यूज़ के लिए अभिलाष शुक्ला की रिपोर्ट।
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