देशभर में गूंजा डिंडोरी का नाम: वेस्ट जोन में नंबर वन-देश में द्वितीय

डिंडोरी: आमतौर पर सरकारी योजनाएं फाइलों और बैठकों तक सिमटकर दम तोड़ देती हैं, लेकिन डिंडोरी जिले की कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया की प्रशासनिक दूरदर्शिता और कड़े संकल्प ने 'जल गंगा संवर्धन अभियान' को एक ऐतिहासिक आंदोलन में बदल दिया है। कलेक्टर महोदया के कुशल मार्गदर्शन और उनके द्वारा तैयार की गई विशेष रणनीति का ही नतीजा है कि आज डिंडोरी जिला जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश के नक्शे पर सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरा है।

श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने खुद जमीन पर उतरकर जिस तरह से जिले के तमाम विभागों और आम जनता के बीच एक अटूट कड़ाई की शुरुआत की, उसी की बदौलत आज इस अभियान के क्रांतिकारी और सकारात्मक परिणाम धरातल पर साफ नजर आ रहे हैं।


कलेक्टर की दूरदर्शिता से देश में चमका डिंडोरी: रैंकिंग में हासिल किया शीर्ष स्थान

कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के नेतृत्व में चलाए गए इस महा-अभियान की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट इसके शानदार गवाह हैं:

वेस्ट जोन में नंबर वन: भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण वेस्ट जोन के 5 राज्यों के तमाम जिलों को पीछे छोड़ते हुए कलेक्टर के कुशल प्रबंधन की बदौलत डिंडोरी जिला पूरे जोन में प्रथम स्थान पर काबिज हो गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर डंका: यदि देश के सभी जिलों की बात की जाए, तो डिंडोरी ने पूरे देश में दूसरा (द्वितीय) स्थान हासिल कर एक अभूतपूर्व कीर्तिमान रचा है।

कलेक्टर के मार्गदर्शन में खड़ा हुआ 4.30 लाख जल संरचनाओं का जाल

कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने जिले के सभी प्रमुख विभागों को एक 'टीम डिंडोरी' के रूप में एकजुट किया। उनके कड़े नीतिगत फैसलों और नियमित मॉनिटरिंग के कारण ही तय समय सीमा के भीतर जिले में 4 लाख 30 हजार 249 जल संरचनाओं का निर्माण और पुनरुद्धार संभव हो सका।

कलेक्टर के इस मिशन में हर वर्ग ने कंधे से कंधा मिलाया:

  • रोजगार और जल संचय का बेहतरीन तालमेल: जिला पंचायत सीईओ श्री हिमांशु चंद्र और ग्रामीण विकास विभाग की टीम ने कलेक्टर के निर्देशों पर मनरेगा के जरिए रिकॉर्ड समय में जल संरचनाएं खड़ी कीं और ग्रामीणों को रोजगार दिया।

  • महिला शक्ति को दिया नेतृत्व: कलेक्टर ने इस अभियान में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की, जिसके चलते लगभग 20 हजार से अधिक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने आगे बढ़कर इन जल संरचनाओं को आकार दिया।

  • शासकीय भवनों का कायाकल्प: जल संकट के स्थाई समाधान के लिए कलेक्टर की विशेष योजना के तहत करीब 60 हजार प्रधानमंत्री आवासों और 2,000 से अधिक आंगनबाड़ियों व शासकीय स्कूलों में 'रूफ वाटर हार्वेस्टिंग' (छत के पानी को सहेजने) की प्रणालियां स्थापित की गईं।

ग्राउंड रिपोर्ट: कलेक्टर की प्रेरणा से उपजे अनोखे नवाचार

इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि कलेक्टर ने इसे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ दिया। ग्राम पंचायत भर्रा और बजाग विकासखंड के पिंडरुखी जैसे ग्रामीण इलाकों में 'कम्युनिटी इंजीनियरिंग' के ऐसे अनोखे उदाहरण देखने को मिले, जो अब दूसरे जिलों के लिए भी रोल मॉडल बन रहे हैं।

यहाँ कलेक्टर की प्रेरणा से दो घरों के बीच में एक सोखता गड्ढा बनाने का नया मॉडल लागू किया गया, जिससे गलियों का व्यर्थ पानी सीधे जमीन के भीतर जाकर भूजल स्तर को बढ़ाने लगा। इसके साथ ही तकनीकी विभागों ने वैज्ञानिक डिजाइन तैयार किए और कृषि विभाग ने किसानों को 'मटका आधारित टपक पद्धति' जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों से रूबरू कराया।

बैगा आदिवासी समुदाय के बीच खुद फील्ड में उतरीं कलेक्टर

इस आंदोलन की सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर डिंडोरी के पारंपरिक बैगा आदिवासी समुदाय के बीच से सामने आई। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने सिर्फ दफ्तर में बैठकर समीक्षा बैठकें नहीं कीं, बल्कि उन्होंने खुद फील्ड में उतरकर तालाबों, नदियों और घाटों के गहरीकरण के लिए ग्रामीणों का हौसला बढ़ाया। कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों का उत्साह दोगुना हो गया और वे श्रमदान से लेकर जल संरचनाओं की देखरेख में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे।

पर्यावरण संरक्षण को भी दिया नया आयाम: कलेक्टर के विजन के चलते यह अभियान सिर्फ पानी रोकने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे पर्यावरण से भी जोड़ा गया। बड़े पैमाने पर किए जा रहे पौधरोपण में पौधों को जीवित रखने के लिए 'मटका सिंचाई प्रणाली' (बूंद-बूंद सिंचाई) जैसे अनूठे उपाय अपनाए जा रहे हैं, ताकि कम पानी में भी पौधों को सुरक्षित रखकर डिंडोरी को हरा-भरा बनाया जा सके।

सत्य प्रहार ब्यूरो रिपोर्ट।

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