डिंडोरी जिला जेल से एक बेहद ही सकारात्मक, अनोखी और समाज को बड़ा संदेश देती हुई खबर सामने आई है, जेल परिसर में कैदियों के रहने की क्षमता को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और आधुनिक सुविधाओं से लैस एक शानदार डबल स्टोरी बैरक का निर्माण किया गया है। इस नवनिर्मित भवन का उद्घाटन महज एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर नहीं रहा, बल्कि गायत्री परिवार की बहनों द्वारा गूंजते हुए मंत्रों और पूरे विधि-विधान से किए गए हवन-पूजन के साथ इसे एक आध्यात्मिक और सुधारात्मक उत्सव का रूप दिया गया। इस पूरे कार्यक्रम की सबसे खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली बात यह रही कि इस नई बैरक का उद्घाटन करने के लिए किसी बड़े नेता या प्रशासनिक अधिकारी को नहीं बुलाया गया, बल्कि जेल के ही सबसे बुजुर्ग और वरिष्ठ कैदी श्रीनान शाह के हाथों फीता कटवाया गया। जब वरिष्ठ कैदी श्रीनान शाह से बात की गई, तो उन्होंने इस सम्मान के लिए जेल प्रशासन का आभार माना और एक बेहद भावुक व गहरा संदेश देते हुए कहा कि वह यहाँ लंबे समय से हैं, लेकिन वह दिल से चाहते हैं कि समाज में दोबारा किसी को भी यहाँ आने की नौबत न आए और लोग अपराधों से दूर रहें।
सुरक्षा के कड़े मानकों और आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ बनी इस नई डबल स्टोरी बैरक के तै
यार होने से डिंडोरी जिला जेल में एक बड़ी समस्या का समाधान हुआ है। जेल अधीक्षक लव सिंह काटिया ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण में लगभग 99 लाख रुपये यानी करीब एक करोड़ रुपये की लागत आई है। इस नई बैरक के शुरू होने से जेल की कैदी क्षमता जो पहले मात्र 70 थी, वह अब बढ़कर सीधे 110 हो गई है, यानी अब यहाँ 40 और कैदियों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा। इस बैरक को पूरी तरह आधुनिक और मानवीय जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है, जिसमें सुचारू रनिंग वाटर की सुविधा, आधुनिक लेट-बाथ, पर्याप्त लाइट और पंखों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही कैदियों की सुरक्षा और अनुशासन को चाक-चौबंद रखने के लिए पूरी बैरक के भीतर सीसीटीवी कैमरे भी इंस्टॉल किए गए हैं। इस गौरवशाली पल के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर वर्मा और डिंडोरी के एसडीओपी श्री सतीश द्विवेदी विशेष रूप से उपस्थित रहे और इस पहल की सराहना की।
इस ऐतिहासिक उद्घाटन के बाद जब सत्य प्रहार न्यूज़ की टीम ने जेल परिसर का बारीकी से भ्रमण किया, तो वहाँ एक और अद्भुत और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने पूरी टीम का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जेल परिसर में एक बेहद ही खूबसूरत और कलात्मक प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके पीछे की कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प है। दरअसल, इस शानदार कलाकृति को बाहर के किसी नामी या पेशेवर कलाकार ने नहीं बनाया है, बल्कि इसे इसी जेल के भीतर बंद कैदियों ने पूरी तरह से वेस्ट मटेरियल यानी कबाड़ के सामान को रीसायकल करके अपने हाथों से तैयार किया है। इस कबाड़ से बनी मूर्ति का संदेश सीधा और बहुत गहरा है, जिसमें एक इंसान को हथौड़ी और छेनी लेकर खुद को ही पत्थरों से तराशते हुए यानी 'स्वनिर्माण' करते हुए दिखाया गया है। यह मूर्ति इस बात का जीवंत प्रतीक है कि परिस्थितियां चाहे जो भी रही हों, इंसान अगर सच्चे मन से ठान ले तो वह अपनी पुरानी गलतियों और कमियों को सुधारकर खुद को एक नया, सकारात्मक और बेहतर जीवन दे सकता है। डिंडोरी जिला जेल की यह नई बैरक जहाँ जेल प्रबंधन को मजबूती देगी, वहीं कैदियों की यह कलाकृति जेलों को केवल सजा का घर न मानकर उन्हें वास्तविक 'सुधार गृह' बनाने के प्रयासों की एक बेहद सुंदर और अनुकरणीय बानगी पेश करती है।

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