कलेक्टर के माध्यम से शासन को सौंपा ज्ञापन; ₹38 से ₹42 हजार मानदेय और भत्ते लागू करने की अपील
डिंडौरी। मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कौशल विकास की नींव मजबूत करने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों और शिक्षकों ने अब अपने अधिकारों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जिले के व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने कलेक्टर के माध्यम से राज्य शासन को एक प्रभावी ज्ञापन सौंपकर सम्मानजनक वेतनमान और अन्य जरूरी सुविधाएं तत्काल लागू करने की मांग की है। प्रशिक्षकों का कहना है कि वे प्रदेश के छात्र-छात्राओं का भविष्य गढ़ने में दिन-रात जुटे हैं, इसलिए शासन को उनके हितों की रक्षा के लिए जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेना चाहिए।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है कि मध्य प्रदेश राजपत्र दिनांक 30 अप्रैल 2026 के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षक और शिक्षक को "उच्च कुशल" (Highly Skilled) श्रेणी में शामिल किया जा चुका है। लेकिन विडंबना यह है कि इस राजपत्र के जारी होने के बाद भी उन्हें अब तक इस श्रेणी के अनुरूप उचित वेतन और मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक विसंगतियां खड़ी हो रही हैं।
समयबद्ध पदोन्नति और सुरक्षा कवर की प्रमुख मांग
अपनी मांगों को रेखांकित करते हुए प्रशिक्षकों ने मांग की है कि "उच्च कुशल" श्रेणी के मापदंडों के अनुसार उनका मासिक वेतनमान ₹38 हजार से ₹42 हजार के बीच निर्धारित किया जाए और इसमें प्रतिवर्ष कम से कम 5 प्रतिशत की वेतनवृद्धि जोड़ी जाए। इसके साथ ही एक निश्चित समयबद्ध पदोन्नति नीति बनाकर "अतिउच्च कुशल" श्रेणी तक तरक्की का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
प्रशिक्षकों ने केवल वेतन ही नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी भत्ता, ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), सवैतनिक अवकाश और कार्यस्थल दुर्घटना बीमा जैसी आवश्यक सुविधाएं लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि श्रम मंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, श्रम आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय और वित्त विभाग को भी भेजी गई है, ताकि इस दिशा में जल्द से जल्द प्रशासनिक और वित्तीय कदम उठाए जा सकें।
0 टिप्पणियाँ