डिंडोरी। मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर "अंधेर नगरी, चौपट राजा" वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। जहाँ एक तरफ सरकार सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं डिंडोरी में प्रशासन अपनी ही संपत्ति बचाने के लिए जनता को न्यायालय जाने की सलाह दे रहा है।
क्या है पूरा मामला?
वार्ड क्रमांक 04 के निवासी विकास जैन और अन्य वार्ड वासियों ने कन्या शाला परिसर के पास स्थित एक शासकीय कुएं पर हो रहे अवैध अतिक्रमण और वहां चल रही अवैध गतिविधियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
अवैध कब्जा: आरोप है कि एक स्थानीय निवासी ने शासकीय कुएं को घेरकर उस पर अवैध कब्जा कर लिया है।
अवैध शराब बिक्री: शिकायतकर्ता के अनुसार, उक्त स्थान पर अवैध शराब की बिक्री होती है, जिससे देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है और मोहल्ले की शांति भंग होती है।
तीसरी बार जनसुनवाई: विकास जैन आज तीसरी बार अपनी गुहार लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे, इस उम्मीद में कि इस बार सरकारी संपत्ति को भू-माफियाओं से मुक्त कराया जाएगा।
SDM का 'अजीब' फरमान
हैरानी की बात तब हुई जब इस गंभीर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करने के बजाय, संबंधित अधिकारी (SDM) ने आवेदन पर एक टीप लिख दी कि "कब्जे का प्रकरण तहसील न्यायालय में दर्ज कराएं।"
सवाल यह उठता है: अगर सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण है, तो उसे हटाने की जिम्मेदारी प्रशासन की है या उस आम नागरिक की जो टैक्स भरता है? क्या अब जनता सरकार की तरफ से वकील बनकर सरकारी संपत्ति की लड़ाई लड़ेगी?
जनता में आक्रोश
शिकायतकर्ता विकास जैन का कहना है कि वे केवल एक जागरूक नागरिक होने का फर्ज निभा रहे थे और प्रशासन को सरकारी कुएं पर हो रहे अवैध कब्जे और गंदगी की सूचना दे रहे थे। लेकिन प्रशासन का यह टालमटोल भरा रवैया अपराधियों के हौसले बुलंद करने वाला है।

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