डिण्डौरी। मध्य प्रदेश शासन की प्राथमिकताओं में शामिल 'जल गंगा संवर्धन अभियान' और 'जल संचय में जन भागीदारी 2.0' को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है । इस अभियान की सफलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है । इस आदेश के तहत जिले में जल संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है |
कलेक्टर द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, जिले में 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक निर्मित की गई सभी विभागीय जल संरचनाओं के जियो-टैग फोटो पोर्टल पर अपलोड किए जाने अनिवार्य हैं । इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, श्री दिव्यांशु चौधरी (भा.प्र.से.) को मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है । उनकी सहायता के लिए मनरेगा के परियोजना अधिकारी श्री प्रदीप शुक्ला को सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है । यह पूरी प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं |
प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस अभियान को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में नदियों के उद्गम स्थलों का विकास किया जाएगा और उनके किनारों पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाना है, जिसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्याऊ की स्थापना और प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को कम करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
डिण्डौरी जिले में यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है । पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित इस महाभियान के तहत हजारों की संख्या में खेत तालाबों और अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य भी समय सीमा में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का यह कदम न केवल जल स्तर को सुधारने में सहायक होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगा।
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