डिंडौरी। परिवहन विभाग में करोड़ों रुपये के टैक्स घोटाले और दस्तावेजों को खुर्द-बुर्द करने के मामले में जिला न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला परिवहन कार्यालय डिंडौरी में पदस्थ सहायक ग्रेड-1 क्लर्क, पुष्पकुमार प्रधान द्वारा लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका को माननीय न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया है।
यह मामला शासकीय पद के दुरुपयोग और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ से जुड़ा है, जिसके कारण शासन को करीब 9 करोड़ रुपये की भारी चपत लगी है। साझा किए गए आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, आरोपी पुष्पकुमार प्रधान पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इन बसों को कागजों पर कबाड़ (स्क्रैप) घोषित कर दिया गया था, जबकि असल में वे लगातार सड़कों पर संचालित हो रही थीं। फाइलों के गायब होने के कारण शासन की वसूली प्रक्रिया बाधित हुई और करोड़ों का राजस्व घाटा हुआ। अपराध की गंभीरता और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी क्लर्क को अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया है।
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