सकारात्मक पहल: डिंडौरी में 'स्वच्छ जल अभियान' से सुरक्षित भविष्य की नींव; सजग प्रशासन और जागरूक जनता के साथ इंदौर जैसी त्रासदी को टालने की तैयारी

डिंडौरी | ब्यूरो रिपोर्ट

इंदौर में दूषित पेयजल से उत्पन्न हुई स्वास्थ्य चुनौतियों को एक सबक के रूप में लेते हुए डिंडौरी नगर परिषद प्रशासन ने एक प्रशंसनीय और दूरदर्शी पहल की है। मध्यप्रदेश शासन के 'जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण' विजन को धरातल पर उतारते हुए नगर परिषद द्वारा शुरू किया गया "स्वच्छ जल अभियान" न केवल नागरिकों की सेहत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भविष्य की किसी भी संभावित त्रासदी को रोकने की दिशा में एक सुरक्षा कवच की तरह उभर रहा है।

साझा प्रयास: जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि उतरे मैदान में अभियान के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 01, 02, 09 एवं 10 में नगर परिषद और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की संयुक्त टीम ने पूरी गंभीरता के साथ पेयजल मानकों की जांच की। वार्ड नंबर 9 की पार्षद श्रीमती स्मिता बर्मन और वार्ड नंबर 10 की पार्षद श्रीमती सारिका नायक ने इस कार्य में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए यह सुनिश्चित किया कि हर घर तक पहुँचने वाला पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा उतरे। 'अमृत मित्र' दीदियों द्वारा घर-घर जाकर किया गया संवाद इस अभियान की रीढ़ साबित हो रहा है, जो जनता और प्रशासन के बीच भरोसे की कड़ी को मजबूत कर रहा है।

रचनात्मक सुझाव: और भी बेहतर हो सकती है व्यवस्था प्रशासन के इन प्रयासों के बीच, नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुछ बुनियादी तकनीकी सुधारों पर और ध्यान दिया जाए, तो यह व्यवस्था 'शून्य दोष' (Zero Error) वाली बन सकती है। नगर के कुछ वार्डों में नालियों के निकट या उनके बीच से गुजरने वाली पाइपलाइनों को व्यवस्थित करना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हमारा उद्देश्य इन संवेदनशील बिंदुओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित लीकेज या रिसाव के कारण होने वाली दुर्घटना को समय रहते टाला जा सके।


सुरक्षित कल की ओर बढ़ते कदम अभियान का नेतृत्व कर रहे नोडल अधिकारी यशवंत मसराम, राजस्व प्रभारी आशीष कुमार कोरी और सिटी मिशन मैनेजर श्रीमती श्वेता तिवारी का स्पष्ट मानना है कि यह अभियान महज एक शुरुआत है। पीडीएमसी से आरई अभिषेक बिसेन सहित तकनीकी अमले का ऑडिट इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन अब व्यवस्था को जड़ से मजबूत करना चाहता है।

यदि नालियों के भीतर बिछी पुरानी पाइपलाइनों के विस्थापन और पेयजल स्रोतों की घेराबंदी जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है, तो डिंडौरी पूरे प्रदेश के लिए 'जल सुरक्षा' का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। प्रशासन की यह सक्रियता और सुधार के प्रति उनकी तत्परता निश्चित रूप से सराहनीय है, जो शहर को एक स्वस्थ और सुरक्षित कल की ओर ले जा रही है।

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