डिंडोरी | विशेष विश्लेषण | सत्य प्रहार न्यूज़ ब्यूरो
डिंडोरी जिले में RTI कानून का गला घोंटा जा रहा है। "सत्य प्रहार" की पड़ताल में सामने आया है कि 10 से ज्यादा विभागों ने सूचना देने के बजाय 'मौन व्रत' धारण कर लिया है। लगता है जिले के अधिकारियों ने एक नया नारा अपना लिया है— "तुम आवेदन लगाते रहो, हम फाइलें दबाते रहेंगे।" अब इन सबकी शिकायत सीधे CVC (दिल्ली) और भोपाल मंत्रालय भेजी जा रही है।
विभागवार भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा और लंबित RTI की स्थिति:1. सामान्य प्रशासन विभाग (कलेक्टर कार्यालय)
RTI क्रमांक MPRTI/2510/589772: यहाँ गौशालाओं के अनुदान और पट्टों की जानकारी मांगी गई थी। 4 नवंबर 2025 की डेडलाइन बीते जमाना हो गया, पर विभाग चुप है।
शायद विभाग को डर है कि अगर सच बताया तो कागजी गायें बुरा मान जाएंगी। अनुदान की राशि कहाँ गई, यह बताना शायद 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा बन गया है???
RTI क्रमांक MPRTI/2510/590677: प्रतिबंधित क्षेत्र में हुई रजिस्ट्रियों की अनुमति देने वाले 'जादुई' अधिकारियों के नाम मांगे गए थे।
जानकारी न देना यह बताता है कि यहाँ नियम केवल आम जनता के लिए हैं, रसूखदारों के लिए तो कलेक्टर कार्यालय के दरवाजे और कायदे हमेशा खुले रहते हैं????
2. महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD)
RTI क्रमांक MPRTI/2510/599558: आंगनबाड़ियों के 'सेफ्टी ऑडिट' और Fire NOC की जानकारी मांगी गई थी।
विभाग शायद 'अन्तर्यामी' है, उन्हें पता है कि बच्चे सुरक्षित हैं, फिर किसी सुरक्षा प्रमाण पत्र या ऑडिट की क्या ज़रूरत? फाइलें छिपाना ही इस विभाग की सबसे बड़ी 'सुरक्षा' नीति बन गई है?
3. नगर परिषद डिंडोरी
पेड़ों की छंटाई और सफाई (RTI क्रमांक: 599774): पेड़ों की कटाई और दशहरा उत्सव के बिल-वाउचर मांगे गए थे।
पेड़ों की छंटाई इतनी 'गहरी' हुई है कि पारदर्शिता की जड़ें ही काट दी गई हैं। उत्सव का जश्न तो खत्म हो गया, पर बिलों का रहस्य अभी भी बरकरार है????
प्रधानमंत्री आवास योजना (RTI क्रमांक: 607944): PMAY में अपात्रों के चयन पर सवाल पूछे गए थे।
नगर परिषद शायद 'परोपकारी' हो गई है, इसलिए पात्रों को छोड़कर अपात्रों पर ज्यादा मेहरबान है। सच बताने में इन्हें शर्म आ रही है या डर, यह बड़ा सवाल है????
4. खनिज साधन विभाग
RTI क्रमांक MPRTI/2511/605396: वैध-अवैध खदानों और रेत ठेकेदारों की सूची मांगी गई थी।
रेत माफिया और विभाग के बीच की 'जुगलबंदी' इतनी मधुर है कि विभाग इस रिश्ते के बारे में कुछ भी बोलकर खलल नहीं डालना चाहता। यहाँ नदियां छलनी हो रही हैं और विभाग 'कुंभकर्णी' नींद में है??????
5. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
PMGSY सड़क संधारण (RTI क्रमांक: 600857): सड़कों की गुणवत्ता की जानकारी मांगी गई थी।
यहाँ सड़कें शायद 'मिस्टर इंडिया' हो गई हैं, जो कागजों पर तो चमक रही हैं पर जमीन पर ढूंढने से भी नहीं मिलतीं। भुगतान हो गया, पर काम का पता नहीं??
कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्ति (RTI क्रमांक: 609345): नियुक्तियों और दस्तावेजों की मांग की गई थी।
योग्यता और चयन प्रक्रिया बताना शायद 'गोपनीय' मामला है, क्योंकि बिना 'सेटिंग' के यहाँ पत्ता भी नहीं हिलता???
6. स्कूल शिक्षा विभाग (DPC)
RTI क्रमांक MPRTI/2511/605394: कस्तूरबा गांधी छात्रावासों (KGBV) में भोजन और मरम्मत के फर्जी बिलों की आशंका को लेकर जानकारी मांगी गई थी।
बाबुओं की मेहरबानी देखिए, छात्रावासों के राशन से ज्यादा शायद उनकी जेबें भरी जा रही हैं। जानकारी न देना ही इस 'भोजन घोटाले' का सबसे बड़ा सबूत है????
7. खाद्य विभाग और वन विभाग
BPL सूची (RTI: 607152): अमीरों के नाम गरीबी रेखा की सूची में कैसे आए, यह पूछा गया था।
वन विभाग (RTI: 598627): डिपो में सड़ रही लकड़ी का हिसाब माँगा गया था।
डिपो की लकड़ियाँ और विभाग की कार्यशैली, दोनों ही दीमक का शिकार हो चुके हैं???
RTI के अलावा अन्य 'ज्वलंत' मुद्दे: प्रशासन की लापरवाही का आलम
स्वास्थ्य सुरक्षा: समनापुर के 'बंगाली डॉक्टर' और झोलाछाप चिकित्सक प्रशासन की नाक के नीचे जनता की जान से खेल रहे हैं।
प्रशासन शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है ताकि बाद में जांच कमेटी बनाकर और फोटो खिंचवाकर अपना काम पूरा कर सके।
शराब माफिया: नर्मदा तट पर अवैध शराब और दुकानों पर 25% एक्स्ट्रा वसूली। आबकारी विभाग को शायद गणित समझ नहीं आता या फिर एक्स्ट्रा वसूली का हिस्सा 'ऊपर' तक पहुँच रहा है????
यातायात और RTO: 'नो-एंट्री' में भारी वाहन और बसों की मनमानी वसूली। यातायात प्रभारी को शिकायत करना मतलब अपनी दीवार से सिर टकराना है।
किसानों का शोषण: धान खरीदी में किसानों के पेट पर लात मारना प्रशासन की नई उपलब्धि बन गई है।
डिंडोरी का प्रशासन 'सब चंगा है' के भ्रम में न रहे। यदि अगले 7 दिनों में इन सभी RTI का बिंदुवार जवाब नहीं मिला और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो "सत्य प्रहार" इन सभी साक्ष्यों को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC, दिल्ली) और राज्य सतर्कता विभाग (भोपाल) का दरवाजा खटखटाएगा।
कलेक्टर महोदया, आपके अधीनस्थ अधिकारी आपकी छवि को 'धूमिल' करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या कलेक्टर महोदया इन लापरवाह अधिकारियों पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई करेंगी या फिर व्यवस्था ऐसे ही ढर्रे पर चलती रहेगी?
"सत्य प्रहार: जो सच है, वही दिखेगा!

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