डिंडोरी में 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' का जश्न—क्या कागजी कीर्तिमानों से मिटेगा कुपोषण का दाग?

डिंडोरी: कल डिंडोरी जिले के नाम एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई। जिला प्रशासन ने एक ही दिन में 48,000 महिलाओं और बच्चियों का हीमोग्लोबिन टेस्ट कर 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराया है। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। हम स्वयं उस समारोह के साक्षी बने जहाँ उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया।

किंतु, इस रिकॉर्ड की चमक के पीछे छिपी जमीनी हकीकत को जब हमने एनीमिया कैंप में जाकर देखा, तो वहां कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जो प्रशासन के संकल्प और व्यवस्था के बीच की दूरी को दर्शाते हैं।

1. रिकॉर्ड की होड़ और जमीनी संघर्ष

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यह देखा गया कि रिकॉर्ड दर्ज कराने की प्रक्रिया में बच्चियों को लंबे समय तक कतारों में खड़ा रहना पड़ा। शारीरिक कमजोरी और थकान के चलते कुछ बच्चियों को जमीन पर बैठे और चक्कर खाकर गिरते हुए देखा गया। सवाल उठता है कि क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों में स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों के आराम का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा

2. छात्रावासों की स्थिति: कथित अनियमितताओं के घेरे में व्यवस्था

जब हमारी टीम ने कैंप में आई SC गर्ल्स हॉस्टल, कस्तूरबा गांधी गर्ल्स हॉस्टल और बालिका छात्रावास डिंडोरी की छात्राओं से चर्चा की, तो भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे:

आरोप: बच्चियों ने कैमरे पर कथित तौर पर बताया कि उन्हें मीनू के अनुसार पोषण नहीं मिल रहा है।

भोजन की गुणवत्ता: छात्राओं का दावा है कि उन्हें केवल दाल-चावल और सीमित सब्जी दी जाती है, जबकि फल और दूध जैसी आवश्यक वस्तुएं उनकी थाली से गायब हैं।

विरोधाभासी बयान: चर्चा के दौरान छात्राओं के बयानों में काफी अंतर देखा गया। कुछ छात्राएं अपने शिक्षकों या वार्डन के दबाव में प्रतीत हो रही थीं, जिससे बयानों में विरोधाभास पैदा हुआ।

3. PNRC में 'घपले' की शिकायत: जांच का विषय

जिले में कुपोषण की समस्या कितनी गहरी है, इसका अंदाजा जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (PNRC) के विरुद्ध मिली एक शिकायत से लगाया जा सकता है:

शिकायत के अनुसार: PNRC में बच्चों के लिए निर्धारित पौष्टिक आहार को कथित रूप से बाहर बेचे जाने और स्टॉक रजिस्टर में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं

प्रशासनिक उदासीनता: शिकायत पत्र में भाई-भतीजावाद और शिकायतकर्ताओं को डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप भी दर्ज हैं

4. लंबित जांच और जवाबदेही

उल्लेखनीय है कि लगभग 3 माह पहले DPC श्वेता अग्रवाल को इन छात्रावासों और व्यवस्थाओं से संबंधित कुछ दस्तावेज सौंपे गए थे। हालांकि उस समय जांच का आश्वासन दिया गया था, किंतु वर्तमान तक उस जांच की स्थिति और निष्कर्षों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

रिकॉर्ड बनना गौरव की बात है, लेकिन डिंडोरी का नाम कुपोषण की सूची में ऊपर होना एक गंभीर चिंता का विषय है। 'अंत्योदय' का संकल्प तभी पूर्ण होगा जब सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़ी इन आदिवासी बच्चियों तक बिना किसी भ्रष्टाचार के पहुंचेगा। क्या प्रशासन इन कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा?

यह सुनिश्चित करना होगा कि 'अंत्योदय' का संकल्प केवल कागजी सर्टिफिकेट्स तक सीमित न रहे। जब तक छात्रावासों में फल, दूध और गुणवत्तापूर्ण भोजन के हक पर भ्रष्टाचार का 'एनीमिया' लगा रहेगा, तब तक हर रिकॉर्ड अधूरा है।

व्यवस्था के सुधार तक हमारी नजर बनी रहेगी। देखते रहिए 'सत्य प्रहार', जहाँ हम बनते हैं 'बच्चियों की आवाज़'।"


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