डिंडोरी। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले डिंडोरी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे एशिया में जिले का नाम रोशन कर दिया है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साझा प्रयासों से 'एनीमिया मुक्त डिंडोरी' अभियान के तहत एक ही दिन में 50,000 से अधिक बालिकाओं और महिलाओं का एनीमिया टेस्ट किया गया। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए डिंडोरी जिले का नाम आधिकारिक तौर पर 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज कर लिया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि डिंडोरी अब पूरे एशिया का ऐसा पहला जिला बन गया है जिसने इतनी बड़ी संख्या में एक ही दिन में स्वास्थ्य जांच का यह कठिन लक्ष्य हासिल किया है।
इस महा-अभियान की सफलता पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज पांडे ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इस मिशन की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह स्वास्थ्य कर्मियों और फील्ड स्टाफ ने दिन-रात मेहनत कर जिले की अंतिम छोर की महिलाओं तक पहुँच बनाई। वहीं भारत सरकार दिल्ली से आए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि डॉ. भानु प्रताप सिंह ने इस रिकॉर्ड की आधिकारिक घोषणा की। डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में डिंडोरी के प्रशासनिक तालमेल और स्वास्थ्य प्रबंधन की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि एक छोटे से जिले द्वारा इतनी बड़ी संख्या में सटीक टेस्टिंग करना स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश करता है।
रिकॉर्ड की पुष्टि होने के पश्चात डॉ. भानु प्रताप सिंह ने कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र और अवार्ड सौंपा। अवार्ड प्राप्त करने के बाद कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने जिले की जनता को संबोधित करते हुए इस सफलता को पूरी टीम और जिले की जागरूक महिलाओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि जिले को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। डॉ. भानु प्रताप सिंह ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में भी इस बात पर जोर दिया कि डिंडोरी ने स्वास्थ्य जागरूकता के मामले में बड़े-बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है। सत्य प्रहार की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जिले के इस गौरवशाली क्षण को पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
0 टिप्पणियाँ