ब्यूरो रिपोर्ट: अभिलाष शुक्ला (सत्य प्रहार)
डिंडोरी के बिरसा मुंडा ग्राउंड में आज 'जल-जंगल-जमीन' की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक जन-आंदोलन का शंखनाद हुआ। अपर नर्मदा प्रोजेक्ट (राघौपुर-बसनिया बांध परियोजना) के विरोध में सैकड़ों आदिवासियों ने हुंकार भरी और साफ कर दिया कि वे अपनी जमीन से बेदखल नहीं होंगे। भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को साक्षी मानकर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी दी है कि जब तक ग्राम सभा की अनुमति नहीं होगी, कोई भी अधिकारी गांव में कदम तक नहीं रख पाएगा।
विधायक डोडियार ने पेसा (PESA) कानून की ताकत का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा ही सर्वोच्च है और सरकार या प्रशासन उनकी मर्जी के बिना कोई भी निर्णय नहीं थोप सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपर नर्मदा प्रोजेक्ट से कई परिवार उजड़ जाएंगे और आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। विधायक ने सरकार के विकास के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि हजारों लोगों को विस्थापित करके कैसा विकास किया जा रहा है? उन्होंने एलान किया कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है और जल्द ही इस मुद्दे को लेकर भोपाल में मुख्यमंत्री और विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान विधायक और ग्रामीणों ने एकजुट होकर तहसीलदार राम कुमार मार्को के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में अपर नर्मदा प्रोजेक्ट को तत्काल निरस्त करने और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। विधायक ने यह भी कहा कि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) हमेशा से जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लड़ती आई है और जब तक यह परियोजना वापस नहीं ली जाती, संघर्ष जारी रहेगा।
सदैव की तरह 'सत्य प्रहार' ने इस पूरे आंदोलन की ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट पेश की है। इस रैली ने यह साफ कर दिया है कि विस्थापन के मुद्दे पर क्षेत्र का आदिवासी समाज पूरी तरह एकजुट है और अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए किसी भी हद तक लड़ने को तैयार है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार आदिवासियों की इस हुंकार के बाद क्या रुख अपनाती है।
देखिये 'सत्य प्रहार' की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट youtube channel par
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