ब्यूरो रिपोर्ट: अभिलाष शुक्ला (सत्य प्रहार)
डिंडोरी जिले के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न सिर्फ मानवता को शर्मसार करती है बल्कि राष्ट्रभक्ति पर भी सवाल खड़े करती है। ग्राम खरगहना में स्थित आरोग्य मंदिर, जिसे शासन ने गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए बनाया था, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जब 'सत्य प्रहार' की टीम शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। अस्पताल के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे गरीब ग्रामीण और बीपी की गोली के लिए भटकती बुजुर्ग महिलाएं सिस्टम की बेरुखी की गवाह बनी खड़ी थीं।
लापरवाही की इंतहा यहीं खत्म नहीं होती। ग्रामीणों ने पड़ताल के दौरान एक ऐसा खुलासा किया जिसे सुनकर किसी भी देशभक्त का खून खौल उठेगा। ग्रामीणों के मुताबिक, बीते 26 जनवरी को जब पूरा देश गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा था, तब इस सरकारी आरोग्य मंदिर का स्टाफ छुट्टी मना रहा था। राष्ट्रीय पर्व के दिन भी यहाँ ध्वजारोहण नहीं किया गया और न ही तिरंगा फहराया गया। यह सीधा-सीधा भारतीय ध्वज संहिता और राष्ट्रीय गौरव का अपमान है। हालांकि, सलाम है खरगहना के उन जागरूक ग्रामीणों को जिन्होंने अस्पताल स्टाफ की इस शर्मनाक हरकत के बाद खुद तिरंगा थामा और अस्पताल प्रांगण में ध्वजारोहण कर देश की लाज बचाई।
इस पूरी अव्यवस्था और राष्ट्रीय पर्व की अनदेखी को लेकर जब 'सत्य प्रहार' ने वहां पदस्थ सीएचओ (CHO) माधुरी जी से फोन पर संपर्क किया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। उन्होंने बड़ी ही सहजता से कह दिया कि वे 'छुट्टी' पर हैं। बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या एक कर्मचारी के अवकाश पर जाने से पूरा सरकारी अस्पताल बंद कर दिया जाएगा? क्या जनता के स्वास्थ्य और जान की कीमत किसी की व्यक्तिगत छुट्टी से कम है? एक तरफ सरकार घर-घर इलाज पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार कर्मचारी अपनी मर्जी से जनता को लावारिस छोड़ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब 'सत्य प्रहार' ने सीएमएचओ (CMHO) डॉ. मनोज पांडे से चर्चा की, तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या तिरंगे का अपमान करने वाले और मरीजों की जान से खेलने वाले इन जिम्मेदारों पर सच में गाज गिरेगी या यह मामला भी पिछली शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। 'सत्य प्रहार' प्रशासन को चेतावनी देता है कि अगर जल्द ही ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो जनता की इस आवाज को और भी उग्र रूप से बुलंद किया जाएगा।
रिपोर्टर: अभिलाष शुक्ला, सत्य प्रहार (डिंडोरी)
0 टिप्पणियाँ