कलेक्टर और एसपी की संवेदनशीलता: भटकते विक्षुप्तों को मिला संरक्षण, उपचार के लिए डबरा ग्वालियर भेजी गई टीम

 डिंडौरी जिले से मानवता और प्रशासनिक तत्परता की एक बेहद सुखद तस्वीर सामने आई है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया एवं पुलिस अधीक्षक श्रीमती वाहनी सिंह के विशेष प्रयासों और संवेदनशीलता से जिले में लंबे समय से भटक रहे विक्षुप्त व्यक्तियों के जीवन में नया उजाला होने जा रहा है। प्रशासन ने न केवल इन व्यक्तियों को सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया है, बल्कि उनके उचित उपचार और पुनर्वास की दिशा में भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

इस मानवीय मुहिम के तहत जिला प्रशासन ने उन लोगों को खोज निकाला जो वर्षों से मानसिक अस्वस्थता के कारण अपनों से दूर थे। इनमें ग्राम पंचायत पिपरिया (शहपुरा) की बसंती वरकडे शामिल हैं, जो बीते 13 वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ होकर दर-दर भटक रही थीं। उन्हें अमरकंटक के कपिलधारा आश्रम से खोजकर लाया गया। इसी प्रकार ग्राम छांटा के ईश्वर प्रसाद, जो अपनी बीमारी के कारण परिजनों से मारपीट कर घर छोड़ चुके थे, उन्हें भी सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इनके साथ ही एक अन्य अज्ञात महिला, जो बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें भी प्रशासन ने अपनी देखरेख में लिया है। इन सभी को वर्तमान में डिंडौरी के नर्मदा वृद्धा आश्रम में रखकर समस्त आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

आज 7 जनवरी 2026 को कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया और पुलिस अधीक्षक श्रीमती वाहनी सिंह ने स्वयं नर्मदा वृद्धा आश्रम पहुँचकर इन विक्षुप्त व्यक्तियों से मुलाकात की और उनसे वार्तालाप कर उनका हाल जाना। इस भावुक क्षण के दौरान विक्षुप्तों के परिजन भी वहां मौजूद रहे, जिनसे कलेक्टर ने विस्तृत चर्चा की। प्रशासन की इस अनूठी पहल को अंजाम तक पहुँचाने में जिला पंचायत सीईओ श्री दिव्यांशु चौधरी की अहम भूमिका रही। उनके विशेष प्रयासों से ग्वालियर की प्रतिष्ठित 'प्रभुजी सेवा संस्था' को डिंडौरी आमंत्रित किया गया। संस्था के संचालक डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौर ने बताया कि वे बीते 8 वर्षों से ऐसे व्यक्तियों का उपचार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं।


कलेक्टर ने परिजनों की सहमति और शपथ पत्र के आधार पर इन तीनों विक्षुप्त व्यक्तियों को निःशुल्क उपचार हेतु डबरा (ग्वालियर) भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। खास बात यह है कि प्रशासन ने इनके सुरक्षित आवागमन के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को भी साथ जाने की अनुमति दी है। जिला प्रशासन की इस समन्वित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकारी तंत्र संवेदनशील हो, तो समाज के सबसे उपेक्षित तबके को भी सम्मानजनक जीवन और अपनों का साथ वापस मिल सकता है। यह पूरी पहल जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और जनता प्रशासन के इस मानवीय चेहरे की सराहना कर रही है।

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