डिंडोरी | ब्यूरो रिपोर्ट: अभिलाष शुक्ला (सत्य प्रहार)
शासन-प्रशासन भले ही मध्य प्रदेश में सशक्त पंचायती राज और 'गांव की सरकार' के बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन डिंडोरी जिले की ग्राम पंचायतों में जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। बीते शुक्रवार को 'सत्य प्रहार' की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर उतरकर रियलिटी चेक किया, तो जो सच सामने आया वह प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
पड़ताल की शुरुआत शुक्रवार सुबह 11 बजे घनाघाट और कूड़ा पंचायत से हुई, जहाँ पंचायत भवनों पर ताला लटका मिला। जहाँ ग्रामीणों की समस्याओं का अंबार होना चाहिए था, वहां सन्नाटा पसरा था। अधिकारी तो दूर, सचिव महोदय ने फोन उठाना भी अपनी शान के खिलाफ समझा। वहीं, गीधा पंचायत में भवन तो खुला था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अपनी कुर्सियों से नदारद पाए गए।
अनियमितता का सबसे बड़ा नमूना ग्राम खरगहना में देखने को मिला। यहाँ नेशनल हाईवे पर ग्रामीणों की सुविधा और बाजार के लिए लगभग 18 लाख की लागत से बाजार शेड बनाया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि आज इस शेड में बाजार नहीं, बल्कि मवेशी बंधे हैं और चारा रखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाजार आज भी सड़क पर लग रहा है जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जबकि लाखों का यह शेड सिर्फ मवेशियों का अड्डा बनकर रह गया है। पिछले कई सालों से ग्रामीण इस भारी अव्यवस्था को झेलने को मजबूर हैं।
जिले की सबसे बड़ी पंचायतों में शुमार गाड़ासरई में दोपहर 1:00 बजे भी ताला लटका मिला। ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बताया कि यह कार्यालय अधिकारियों की मर्जी से ही कभी-कभार खोला जाता है, जिससे जनता त्रस्त हो चुकी है। यहाँ पंचायत मद से लगभग 24 लाख की लागत से 'कॉलेज पहुँच मार्ग' का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें गंभीर अनियमितताएं देखी गईं।
'सत्य प्रहार' इस न्यूज़ के माध्यम से जिला प्रशासन से अपील करता है कि इन पंचायतों में व्याप्त अव्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की जाए। जनता के टैक्स के पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। हमारा उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सत्य को उजागर करना है। हम उम्मीद करते हैं कि इस रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे और उचित कदम उठाएंगे।

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