जबलपुर:(विशेष संवाददाता की रिपोर्ट) जबलपुर के डुमना रोड स्थित ग्राम पंचायत गधेरी में रहने वाले श्री काशी यादव के घर में पिछले कुछ समय से चिंता की लहर थी। उनकी 8 वर्षीय बेटी, आकृति यादव, हृदय रोग से जूझ रही थी। एक साधारण परिवार के लिए दिल की बीमारी का इलाज और उसका खर्च किसी पहाड़ जैसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन नियति ने आकृति के लिए कुछ और ही सोच रखा था।
इस कहानी में मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गधेरी पहुंची। टीम की सदस्य डॉ. मनीषा शर्मा की अनुभवी नजरों ने पहचान लिया कि आकृति के दिल में समस्या है। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना जिला प्रबंधक श्री सुभाष शुक्ला को दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग का तंत्र सक्रिय हो गया। नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान के मार्गदर्शन में बच्ची को जिला अस्पताल लाया गया, जहाँ विशेषज्ञों ने उसकी गहन जांच की।
सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आकृति के केस को 'मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना' के तहत आगे बढ़ाने की अनुशंसा की। सरकारी कागजी कार्रवाई की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित निर्णय लिया और परिजनों की सहमति के साथ आकृति को बेहतर इलाज के लिए मुंबई स्थित 'नारायण हृदयालय' रेफर किया गया।
12 जनवरी 2026 की तारीख यादव परिवार के लिए नई सुबह लेकर आई। मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आकृति की सफल हार्ट सर्जरी की। शासन की योजना के कारण यह बेहद खर्चीला इलाज पूरी तरह निःशुल्क संपन्न हुआ। आज आकृति के दिल की धड़कनें सामान्य हैं और उसके चेहरे पर वह मासूम मुस्कान लौट आई है, जो बीमारी की वजह से कहीं खो गई थी।
अपनी बेटी को नया जीवन मिलता देख काशी यादव का परिवार भावुक है। उन्होंने इस कठिन समय में फरिश्ता बनकर आए मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन, जिला कलेक्टर और जबलपुर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम सहित मुंबई के डॉक्टरों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया है। यह सफल सर्जरी न केवल एक बच्ची की जान बचाना है, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रति आम जनता के अटूट विश्वास की भी जीत है।
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