डिंडौरी: जिले के खेतों में धान की महक तो है, लेकिन उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाओं के नाम पर किसानों के स्वाभिमान की बलि दी जा रही है। पिछले हफ्ते कुकर्रामठ सरहरी उपार्जन केंद्र पर जो नजारा दिखा, उसने प्रशासनिक सूझबूझ के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जहाँ एक तरफ अमरकंटक हाईवे पर किसानों का गुस्सा चक्काजाम के रूप में फूटा, वहीं दूसरी ओर की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसे दबाने की कोशिश जारी है।
कागजों पर 'मजदूरों की फौज', मैदान में किसान बना 'हमाल'
सरहरी केंद्र की कड़वी सच्चाई यह है कि यहाँ किसान खुद ही अपना धान तौल रहा है, खुद ही बोरियां भर रहा है और खुद ही हमाली कर रहा है। रिकॉर्ड के मुताबिक केंद्र पर 25 मजदूर तैनात होने चाहिए, लेकिन मौके से मजदूर गायब मिले। सरकारी फाइलों में मजदूरों के नाम पर भुगतान चढ़ रहा है, लेकिन हकीकत में किसान खाली बोरियों के लिए तरस रहा है।
केंद्र प्रभारी की 'भोली' सूरत और ₹50 का 'खेल'
सबसे बड़े सवाल केंद्र प्रभारी नारायण सिंह ठाकुर के ऊपर खड़े हो रहे हैं, जो इस पूरे मामले में 'भोले' बनकर बैठे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, धान उपार्जन के लिए प्रति बोरा लगभग ₹50 के आसपास की राशि आवंटित होती है। इस केंद्र पर अब तक 1 लाख बोरियों से ज्यादा की खरीदी हो चुकी है। अब सोचिए, इतना बड़ा कारनामा कथित रूप से केंद्र प्रभारी और उच्च अधिकारियों के संज्ञान के बिना कैसे हो रहा है? यह गहन जांच का विषय है कि बिना ऊपर के संरक्षण के इतना बड़ा खेल कैसे संभव है?
अधिकारियों की 'चुप्पी' और किसानों के साक्ष्य
इसको उजागर करने के लिए 'सत्य प्रहार' के पास किसानों के स्पष्ट बयान हैं, जिसमें वे अपनी आपबीती सुना रहे हैं। आप किसानों का दर्द और केंद्र की अव्यवस्था का सच इस वीडियो लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं:
जब हमारी टीम ने इस मामले में जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारी श्री मरावी और उनके अधीनस्थ श्री आकाश तुरकर से मुलाकात की, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या इस चुप्पी को भ्रष्टाचार की मौन स्वीकृति माना जाए?
सत्य प्रहार का संकल्प
हमने सच सामने रख दिया है, अब देखते हैं कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। क्या उन दोषियों पर गाज गिरेगी जो किसानों के हक पर डाका डाल रहे हैं?
सत्य प्रहार: खबर आपकी, प्रहार हमारा। सत्य को सामने लाना हमारा काम है और हम लाकर ही रहेंगे।
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