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शिविर की गरिमा तब और बढ़ गई जब विधायक श्री ओमकार मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रुदेश सिंह परस्ते और जिला अध्यक्ष श्री चमरू सिंह नेताम जैसे जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याओं को सुना। प्रशासनिक मोर्चे पर जिला पंचायत सीईओ श्री दिव्यांशु चौधरी, डीएफओ श्री पुनीत सोनकर और एसडीएम श्री रामबाबू देवांगन सहित समस्त विभागीय अधिकारी मुस्तैद नजर आए, जिससे यह आयोजन संवेदनशील प्रशासन की एक जीवंत मिसाल बन गया।इस एक दिवसीय शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुल 1643 नागरिक अलग-अलग योजनाओं से सीधे तौर पर लाभान्वित हुए। स्वास्थ्य स्टालों पर सवेरे से ही भीड़ जुटने लगी थी, जहाँ 497 लोगों का शुगर, बीपी, सिकल सेल और मोतियाबिंद जैसे गंभीर रोगों का परीक्षण कर उन्हें मुफ्त चश्मा और दवाइयां प्रदान की गईं। आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 5 स्व-सहायता समूहों को ऋण स्वीकृति दी गई, वहीं बुजुर्गों को पेंशन और पात्र परिवारों को आयुष्मान कार्ड सौंपे गए। कृषि विभाग ने मृदा परीक्षण कार्ड बांटे, तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियुक्ति पत्र और लाड़ली लक्ष्मी योजना के स्वीकृति पत्र वितरित कर महिलाओं और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ला दी।
जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को सराहा और कहा कि यह मंच केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कोदो-कुटकी जैसे स्थानीय मोटे अनाजों के संरक्षण पर जोर देते हुए ग्रामीणों को विकसित भारत के सपने से जोड़ा।
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने शिविर के हर स्टाल का भ्रमण किया और हितग्राहियों से सीधा संवाद कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि डिंडौरी जैसे जनजातीय बाहुल्य जिले में शासन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इन शनिवार के विशेष शिविरों का अधिकतम लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएं। करंजिया में हुई यह अभिनव पहल आने वाले समय में पंचायतों में आयोजित होने वाली चौपालों के माध्यम से विकास की इस धारा को हर घर तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
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