डिंडौरी: ट्रैफिक पाठशाला की 'वाहवाही' के पीछे अव्यवस्था का अंधेरा; नो-एंट्री में फिर घुसे मौत के सौदागर

डिंडौरी। जिला मुख्यालय की सड़कों पर पिछले दो दिनों से जो नजारा दिख रहा है, उसने शहर की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। एक तरफ पुलिस विभाग नियम-कायदों की दुहाई देते नहीं थकता, वहीं दूसरी ओर व्यस्ततम समय में भारी-भरकम ट्रकों के अबाध प्रवेश ने प्रशासन की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी है।

पाठशाला में वाहवाही, सड़कों पर तबाही

विडंबना देखिए कि कल एक तरफ ट्रैफिक टीआई श्री सुभाष उइके सांदीपनि विद्यालय मोहतरा में बच्चों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाकर सुर्खियां बटोर रहे थे, ठीक उसी समय उनके पीठ पीछे शहर की 'नो-एंट्री' व्यवस्था दम तोड़ रही थी। टीआई साहब मंच से नियमों की गरिमा समझा कर फारिग हुए ही होंगे और शाम 7 बजे गुजरात पासिंग के दो विशालकाय पाइप लदे ट्रक शहर के सीने को चीरते हुए बीच बाजार दाखिल हो गए। पाइपों से लदे ये ट्रक खचाखच भरी सड़कों पर मौत को दावत देते नजर आए।

आज फिर वही मंजर: 16 चक्का कंटेनर और 'लेन-देन' का खेल?

लापरवाही का आलम यह है कि कल की फजीहत के बाद भी प्रशासन नहीं जागा। आज सुबह करीब 10 बजे, जब स्कूल और दफ्तर जाने का समय था, एक कर्नाटक नंबर का 16 चक्का विशालकाय कंटेनर फिर से मुख्य मार्ग पर घुस गया। चश्मदीदों के अनुसार, पुलिस वाहन की मौजूदगी में ऐसा प्रतीत हुआ मानो 'लेन-देन' के बाद उसे सुरक्षित रास्ता दे दिया गया हो??? कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है या वाकई कोई लगाम कसी जा रही है, इस पर संशय बरकरार है।??

टीआई का जवाब:

जब इस पूरे घटनाक्रम पर ट्रैफिक टीआई सुभाष उइके से चर्चा की गई और उनका वर्जन मांगा गया, तो उनके जवाब हैरान करने वाले थे। उन्होंने पहले तो अपनी गलती मानी, लेकिन साथ ही पल्ला झाड़ते हुए कहा कि— उनके पास स्टाफ की कमी है इंटरसेप्टर शाहपुरा गया है और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का रिटायरमेंट करीब है और वे बीमार रहते हैं, इसलिए चूक हो गई होगी टीआई का यह बयान यह बताने के लिए काफी है कि उन्हें जनता की सुरक्षा और व्यवस्था की कितनी परवाह है।

जनता के तीखे सवाल

  • क्या बीमार और अक्षम स्टाफ के भरोसे पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था छोड़ दी गई है?

  • क्या 'नो-एंट्री' केवल दिखावे के लिए है 

  • क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कुंभकर्णी नींद से जागेगा?

नगर पालिका और राजस्व विभाग की उदासीनता के चलते पहले से ही अतिक्रमण झेल रही डिंडौरी की सड़कें अब इन भारी वाहनों के बोझ तले दब रही हैं। जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है और धरातल पर सख्त कार्रवाई चाहती है।

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