मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप 'प्रशासन गांव की ओर' अभियान अब ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रहा है। विकासखंड शाहपुरा की ग्राम पंचायत कारीगढ़ हरी में आयोजित रात्रि चौपाल इस बात का जीवंत प्रमाण बनी कि कैसे संवेदनशील नेतृत्व जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान कर सकता है। मुख्यमंत्री के विजन को अमलीजामा पहनाते हुए कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदोरिया और जिला पंचायत सीईओ श्री दिव्यांशु चौधरी ने देर रात तक ग्रामीणों के बीच बैठकर न केवल उनकी पीड़ा सुनी, बल्कि उसे दूर करने के लिए तत्काल कड़े कदम भी उठाए।
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदोरिया ने एक कुशल प्रशासक के साथ-साथ एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए चौपाल का संचालन किया। जब महिलाओं ने पानी की किल्लत की बात कही, तो कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीएचई विभाग को 15 दिनों की सख्त समय सीमा दी, जो उनके 'त्वरित न्याय' के संकल्प को दर्शाता है। बच्चों को दुलारने और उन्हें बिस्कुट-चॉकलेट बांटने के उनके सरल अंदाज ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासन केवल दफ्तरों से नहीं, बल्कि गांव की पगडंडियों से चलता है।
वहीं, जिला पंचायत सीईओ श्री दिव्यांशु चौधरी के मार्गदर्शन में ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव साफ नजर आया। स्व-सहायता समूह की दीदियों ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपने सफल व्यवसायों की जानकारी दी, वह सीईओ के कुशल प्रबंधन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का ही परिणाम है। पीएम सोलर पंप योजना के माध्यम से किसानों को 90% अनुदान दिलाने के लिए शिविर आयोजित करने का निर्णय सीईओ की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जिससे क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार आएगा।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जिला प्रशासन की यह सक्रियता डिंडोरी के दूरस्थ अंचलों में सुशासन का नया सवेरा लेकर आई है। रात्रि चौपाल में जिस तरह से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और सड़क जैसे बुनियादी मुद्दों पर मौके पर ही कार्ययोजना तैयार की गई, उसने सरकार और जनता के बीच के विश्वास को और मजबूत किया है। ग्रामीणों ने एक स्वर में मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन की इस 'द्वार पर सरकार' पहल का आभार व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के विकास का स्वर्णिम अध्याय बताया।
0 टिप्पणियाँ