विशेष रिपोर्ट: डिंडौरी नगर परिषद या 'नरक परिषद'? अकर्मण्यता और सिंडिकेट के खेल में पिसती जनता

डिंडौरी। नगर की सरकार चलाने वाली नगर परिषद इन दिनों जनसेवा के लिए नहीं, बल्कि ' अकर्मण्यता के लिए चर्चा में है। आलम यह है कि परिषद के अमले को 'अतिक्रमण न दिखने' की लाइलाज बीमारी हो गई है, जो केवल मंत्रियों के आगमन पर ही ठीक होती है।


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पक्ष-विपक्ष के विधायक भी मंच से जता चुके हैं नाराजगी

नगर परिषद की कार्यप्रणाली से केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि जनप्रप्रतिनिधि भी बुरी तरह नाराज हैं। हाल ही में पीएम आवास योजना (AHP) के आवास वितरण कार्यक्रम के दौरान मंच से डिंडौरी के कांग्रेस विधायक ओमकार मरकाम और शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने परिषद की पोल खोलकर रख दी।

दोनों विधायकों ने विस्तार से नगर में व्याप्त गंदगी, सीवर लाइन योजना की विफलता, आवासों में गुणवत्ताहीन निर्माण और अपात्र हितग्राहियों को  आवास बांटने की शिकायतों पर अपनी बात रखी। विधायकों ने यह तक कहा कि 181 (सीएम हेल्पलाइन) की शिकायतों को निपटाने के लिए जनता पर अनुचित दबाव बनाया जाता है।

'सिंडिकेट' का कब्जा और नदारद सीएमओ

नगर में यह चर्चा आम है कि परिषद में एक 'सिंडिकेट' सक्रिय है। आरोप है कि यहाँ काम केवल उन्हीं का होता है जिनकी पहुंच इस सिंडिकेट तक है, जबकि आम नागरिक सिर्फ दफ्तरों की ठोकरें खाने को मजबूर है। सीएमओ अमित तिवारी की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जनता का आरोप है कि सीएमओ अक्सर 'मीटिंग' के नाम पर अपने कक्ष से नदारद रहते हैं और जनता से मिलना तक मुनासिब नहीं समझते।

दबाव में घुटने टेकती कार्रवाई?

पिछले सप्ताह नगर परिषद ने राजस्व अमले के साथ मिलकर भारी शोर-शराबे के साथ अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू की थी। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर ही स्थितियां 'जस की तस' हो गईं। सवाल यह उठता है कि आखिर किसके दबाव में आकर प्रशासन ने घुटने टेक दिए और अतिक्रमणकारियों को दोबारा सड़कों पर कब्जा करने की खुली छूट दे दी?

सड़कों पर कब्जा, कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी

डिंडौरी की मुख्य सड़कें अब महज 15-20 फीट की गलियों में तब्दील हो गई हैं।अवंती बाई चौक पर सौंदर्यीकरण के नाम पर ईंटों का  ढांचा खड़ा कर दिया गया है। मां नर्मदा की ओर जाने वाली गलियों में इतनी गंदगी है कि बिना नाक पर रुमाल रखे निकलना दूभर है।

कलेक्टर की फटकार बेअसर: स्वयं कलेक्टर महोदया ने सीएमओ को अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन नतीजा 'ढाक के वही तीन पात' रहा।

धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ -नगर का सबसे बड़ा उत्सव 'मां नर्मदा जयंती' करीब है। हजारों श्रद्धालु मां रेवा के दर्शन को आएंगे, लेकिन विडंबना देखिए कि पावन तट के समीप ही मछली और मटन की दुकानें सजी हुई हैं। क्या प्रशासन को यह अपवित्रता और अतिक्रमण दिखाई नहीं देता?

पीएम आवास योजना में 'बड़ा गोलमाल'-आवास वितरण की गूँज अब भोपाल मुख्यालय तक पहुँच चुकी है। नगर में यह चर्चा आम है आवास आवंटन में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसकी जांच होने पर परिषद के कई बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।


जनता से अपील: नगर परिषद की इस तानाशाही और सिंडिकेट राज के खिलाफ 'सत्य प्रहार' आपके साथ खड़ा है। यदि आपके वार्ड में भी भ्रष्टाचार या अव्यवस्था है, तो हमें फोटो और वीडियो भेजें। हम आपकी आवाज़ को दबने नहीं देंगे।

सत्य आपका, प्रहार हमारा।

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