कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने जिला चिकित्सालय का किया औचक निरीक्षण: लापरवाह डॉक्टरों में मचा हड़कंप, व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश

 डिंडौरी | 26 दिसंबर, 2025 डिंडौरी जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया आज सुबह 11 बजे अचानक शासकीय जिला चिकित्सालय जा पहुँचीं। कलेक्टर के इस औचक निरीक्षण ने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी। निरीक्षण के दौरान ओपीडी से लेकर वार्डों तक अव्यवस्था का आलम दिखा और कई जिम्मेदार डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए।

निरीक्षण के दौरान खुली अव्यवस्थाओं की पोल कलेक्टर ने अस्पताल के ओपीडी कक्ष, इमरजेंसी, दवाई वितरण, प्रसूति कक्ष, एनआरसी, सिटी स्कैन सेंटर, लैब और आयुष्मान कार्ड कक्ष का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि सिविल सर्जन डॉ. अजय राज सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी से गायब हैं। उपस्थिति रजिस्टर की जांच करने पर डॉ. धनराज, डॉ. सुरेश मरावी, डॉ. मिनी मोरवी, डॉ. शिवम, डॉ. रंगारे, डॉ. अमित जैन और बीएमओ डॉ. कमलेश राज अनुपस्थित मिले। इस घोर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधक श्री योगेन्द्र उइके को तत्काल सभी अनुपस्थित डॉक्टरों को नोटिस जारी ।

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मरीजों का छलका दर्द: चार दिन से नहीं आए डॉक्टर निरीक्षण के दौरान मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाले मामले भी सामने आए। ग्राम गोयरा के मरीज सूरज लाल, जो चार दिनों से पुरुष वार्ड में भर्ती थे, डॉक्टर के न आने से दुखी होकर बिना इलाज कराए घर लौट रहे थे। कलेक्टर ने उन्हें रोककर समझाया और तत्काल डॉक्टर बुलाकर उपचार शुरू करवाया। वहीं, श्रीमती दीपाली खांडे अपने 9 माह के बच्चे को वैक्सीन लगवाने के लिए पांच दिनों से भटक रही थीं, क्योंकि संबंधित एएनएम ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं। आयुष्मान कक्ष में भी सन्नाटा देख कलेक्टर ने उसे बंद कर ताला लगाने के निर्देश दिए।


प्रबंधन को फटकार और सख्त हिदायत कलेक्टर ने सिविल सर्जन को मौके पर बुलवाकर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि गरीब जनता आपके भरोसे आती है, लेकिन कर्तव्यों के प्रति ऐसी उदासीनता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में बच्चों और पालकों से भेंट की और दवाओं की एक्सपायरी डेट की भी बारीकी से जांच की। निर्माणाधीन नाली और भवन कार्यों के लिए सब-इंजीनियर को रिपोर्ट पेश करने को कहा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर इलाज मिलना ही चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही होने पर सीधे उनके व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।


सत्य प्रहार की खबर का महा-असर

उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय की इन अव्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं में आ रही गिरावट को लेकर 'सत्य प्रहार' समाचार पत्र ने बीते 11 दिसंबर को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। 'सत्य प्रहार' ने अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों की मनमानी और मरीजों को हो रही परेशानियों को उजागर किया था। आज कलेक्टर की यह सख्त कार्रवाई उसी खबर का सीधा असर है। 'सत्य प्रहार' की मुहिम रंग लाई  जनहित के मुद्दों पर हमारी यह निष्पक्ष पत्रकारिता आगे भी जारी रहेगी।

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