डिंडोरी जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच एक ऐसा कार्य हुआ है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। जिला कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए देर रात 10 बजे नगर के विभिन्न स्थानों का औचक निरीक्षण किया। उनका यह कदम भीषण ठंड में ठिठुर रहे गरीबों, राहगीरों और परिक्रमा वासियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है।
💖 संवेदनशीलता की पराकाष्ठा: खुद उतरकर परखी व्यवस्थाएँ
जब तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था, तब कलेक्टर श्रीमती भदौरिया ने अपनी गहन संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने रैन बसेरों, बस स्टैंडों, धर्मशालाओं, और घाटों पर रुककर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उनका यह प्रयास दिखाता है कि जनता की सेवा उनके लिए केवल एक सरकारी कर्तव्य नहीं, बल्कि एक मानवीय मिशन है।
🤝 नेपाल से आए नागरिकों के लिए विशेष सहयोग
निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर महोदया ने नेपाल के जुमला जिले से आए जड़ी-बूटी विक्रेताओं से मुलाकात की। उन्होंने न सिर्फ उनका हाल-चाल जाना, बल्कि तत्काल गर्म कपड़े उपलब्ध कराने के निर्देश दिए और भविष्य में किसी भी समस्या के लिए सीधे संपर्क करने हेतु अपना निजी मोबाइल नंबर भी प्रदान किया! यह अतिथि देवो भवः की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
🙏 परिक्रमा वासियों के लिए प्रभावी इंतजाम
नर्मदा नदी किनारे गुजराती धर्मशाला में, उन्होंने नासिक, जबलपुर, गुजरात, खंडवा सहित विभिन्न राज्यों और नेपाल से आए परिक्रमा वासियों से आत्मीय चर्चा की। कलेक्टर ने उनसे सुविधाओं का फीडबैक लिया और ठंड से सुरक्षा हेतु चादर, कंबल और विश्राम की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह धर्म और आस्था के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
🔥 ठंड से बचाव के लिए 'अलाव' की व्यापक व्यवस्था
कलेक्टर के मार्गदर्शन में, बढ़ती ठंड को देखते हुए नगर में लकड़ी और जलावन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। बस स्टैंड, नर्मदा घाट, धर्मशालाओं, रैन बसेरों और प्रमुख चौराहों पर अलाव की प्रभावी व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी राहगीर, यात्री या परिक्रमा वासी को ठिठुरना न पड़े। रुकने और आराम की उचित व्यवस्थाएँ भी सुनिश्चित की गई हैं।
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया का यह नगर भ्रमण प्रशासनिक दक्षता और मानवीय मूल्यों के समन्वय का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। उनकी सक्रियता, दयालुता और जमीनी स्तर पर कार्य करने की लगन डिंडोरी जिले के लिए गर्व का विषय है। उनकी इस पहल से यह संदेश गया है कि जब नेतृत्व संवेदनशील होता है, तो सबसे कमजोर वर्ग को भी संबल मिलता है।
डिंडोरी कलेक्टर का यह कार्य निश्चित रूप से अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा है!
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