उच्च-स्तरीय जाँच की मांग! डिंडोरी में दर्जन भर सड़कें टर्मिनेट, NQM दौरा सवालों के घेरे में, तीन माह में 3 GM; सवाल- जब सड़क बन रही थी, तो इंजीनियर कहाँ थे?
MPRRDA (मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण) की कार्यप्रणाली पर डिंडोरी जिले में लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की गहन पड़ताल के अनुसार, यहाँ पदस्थ इंजीनियरों और अधिकारियों का एक समूह कथित तौर पर एक 'भ्रष्टाचार का सिंडिकेट' चलाने की आशंका है। इसके कारण सड़कें बदहाल हैं, और ईमानदार ठेकेदारों को अनुचित दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अधिकारी मात्र नोटिस जारी कर जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।
'माल खिलाओ, क्लीयरेंस पाओ': सिंडिकेट की आशंका
नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने हमें बताया कि इस कथित सिंडिकेट द्वारा सिर्फ उन ठेकेदारों को काम में आसानी दी जाती है, जो उन्हें 'मलाई' (अवैध राशि) खिलाने को तैयार होते हैं। इसके विपरीत, जो ठेकेदार ईमानदारी से काम करते हैं, उनके प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर कागजी कार्रवाई में उलझाया जाता है, और उन्हें Terminate करने या वसूली का दबाव बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में, विभाग में बैठे बाबू भी कथित तौर पर बिना लेनदेन के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ाते हैं।
🛑 टर्मिनेशन पर बड़ा सवाल: जब सड़क बन रही थी, तो इंजीनियर कहाँ थे?
डिंडोरी जिले में एक दर्जन से अधिक MPRRDA मार्गों को Terminate कर दिया गया है। अगर सड़कों को टर्मिनेट करना ही एकमात्र हल है, तो सवाल उठता है कि जब ये सड़कें बन रही थीं और उनका रखरखाव (Maintenance) हुआ, तब इंजीनियर साहब क्या कर रहे थे?
सिर्फ ठेकेदारों पर एकतरफा कार्रवाई इस आशंका को बल देती है कि इंजीनियर अपने आपको सुरक्षित करने के लिए यह रास्ता अपना रहे हैं।
किंतु, इस पूरे घटनाक्रम की मुश्किलों को जनता भोग रही है, जिनके गाँवों की सड़कें अधूरी पड़ी हैं और PM जनमन जैसी योजनाएं कछुए की गति से आगे बढ़ रही हैं।
इंजीनियरों के जवाब में दोहरापन: टर्मिनेशन और रखरखाव में घालमेल की आशंका
सत्य प्रहार ने विभाग के इंजीनियरों से सीधे उनके कार्यक्षेत्र के बारे में जानकारी मांगी।
| अधिकारी का नाम | पैकेज और जवाब | मुख्य बिंदु |
| श्री अक्षय पटेल | उनके अंतर्गत 11 पैकेज PTN040 में आते हैं, जो रखरखाव (Maintenance) के हैं और रामगुडा रोड को टर्मिनेट कर दिया है। | एक ही ठेकेदार के पास रखरखाव के 11 पैकेज, वहीं दूसरी कंपनी की सड़क टर्मिनेट। |
| श्री संजय वर्मा | उनका कहना था कि कुछ सड़कें (PTN032) को टर्मिनेट कर रखा है और कुछ सड़कों पर KARANJIYA रखरखाव होने वाला है। | टर्मिनेशन और रखरखाव की योजनाओं में स्पष्टता का अभाव। |
PM जनमन योजना पर भी लेटलतीफी:
श्री पटेल ने बताया कि पाइपलाइन की समस्या के कारण काम रुका था, जो अब चालू होने वाला है। हालांकि, जब हमने संबंधित कागजातों की मांग की, तो उनके द्वारा अभी तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
⚠️ दो महीने से RTI पर चुप्पी: नागरिक अधिकार का हनन
विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह इसलिए भी गहरा रहा है क्योंकि हमारी ओर से लगाई गई RTI (सूचना का अधिकार) का जवाब विभाग दो महीने से नहीं दे रहा है। एक टैक्स पेयर और जन हित के सवालों को जानने का हर नागरिक को अधिकार है। किंतु, जब अधिकारी खुद को मालिक और जनता को याचक समझने लगें, तब आवाज उठाना जरूरी है।
🔄 नेतृत्व संकट और NQM दौरा संदेह के घेरे में
तीन माह में तीन GM: डिंडोरी MPRRDA में तीन महीने के भीतर तीन महाप्रबंधक बदल चुके हैं। अब श्री सांवले जी (MPEB से प्रतिनियुक्ति पर) ने पिछले हफ्ते कार्यभार संभाला है।
NQM रिपोर्ट पर सवाल: सूत्रों के अनुसार, NQM ने लगभग सभी सड़कों की रिपोर्ट को 'ओके' कर दिया है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। इस रिपोर्ट की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
इन सबको देख ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका का फल जिले की भोली-भाली जनता को भुगतना पड़ रहा है।
📣 जनहित में 'सत्य प्रहार' की नई मुहिम
सत्य प्रहार: आवाज आपकी, कलम हमारी
हम ठेकेदारों को विश्वास दिलाते हैं कि यदि कोई भी आपसे जबरदस्ती उगाही करे, तो हमें हमारे नंबर पर बताएं और साथ ही वीडियो बनाकर भेजें। हम आपकी बात उच्चतम स्तर तक ले जाएंगे।
हम जनता से अपील करते हैं: अगर आपके गाँव में कहीं भी कोई सड़क निर्माण कार्य चल रहा हो और उसमें आपको अनियमितता दिखती है, या आपके इलाके में सड़क की हालत खराब है, तो हमें बताएं।
🚨 अस्वीकरण और उच्च-स्तरीय जाँच की मांग 🚨
हम (सत्य प्रहार) इन सभी तथ्यों की पुष्टि नहीं करते हैं। हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जाँच (High-Level Inquiry) हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो और सत्य जनता के सामने आ सके। हम इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई और जाँच की उम्मीद करते हैं।हम यह नहीं कहते कि सब गलत हैं, लेकिन जब दाल में काले की जगह पूरी दाल ही काली लगे, तो आवाज उठाना जरूरी है।
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