डिंडौरी। नगर परिषद डिंडौरी के तत्वावधान में आज प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास सौंपने का कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल चाबियाँ सौंपने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि विकास के दावों और प्रशासनिक खामियों के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष की तीखी बयानबाजी का गवाह भी बना। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडला-डिंडौरी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में शाहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, डिंडौरी विधायक ओंकार सिंह मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते और नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस सहित जिले के आला अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम के सामूहिक गान और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। नगर परिषद सीएमओ अमित तिवारी ने प्रतिवेदन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके बाद नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस और जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते ने अपने विचार रखे। लेकिन कार्यक्रम में असली हलचल तब पैदा हुई जब डिंडौरी के कांग्रेस विधायक ओंकार सिंह मरकाम मंच पर आए। उन्होंने जहाँ एक ओर आवास योजना की अवधारणा को सराहा, वहीं दूसरी ओर इसकी जमीनी हकीकत पर सरकार और प्रशासन को जमकर आड़े हाथों लिया।
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विधायक मरकाम ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि स्वीकृत 348 आवासों में से पिछले 10 वर्षों में मात्र 100-120 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं, जो विभाग की कछुआ चाल को उजागर करता है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन जनप्रतिनिधियों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है। अधिकारियों को नसीहत देते हुए मरकाम ने कहा कि सत्ता सदैव एक जैसी नहीं रहती, इसलिए अधिकारियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में काम करना चाहिए। उन्होंने नर्मदा की स्वच्छता, सीवर प्रोजेक्ट की विफलता और शहर की सफाई व्यवस्था में हो रहे भेदभाव का मुद्दा भी मुखरता से उठाया। मरकाम ने यहाँ तक चुनौती दी कि यदि सांसद महोदय और प्रशासन दलगत हितों को त्यागकर डिंडौरी के विकास पर ध्यान देंगे, तो वे स्वयं उनका सम्मान करेंगे।
वहीं, शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आई 'आवास क्रांति' का गौरवगान किया। उन्होंने कहा कि आज देश के गरीब व्यक्ति की आँखों में अपने पक्के घर का सपना सच हो रहा है। हालाँकि, उन्होंने भी अपनी ही सरकार के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपात्रों को आवास आवंटित किए जाने की जानकारी मिली है। धुर्वे ने गंभीर खुलासा करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत करने वाले गरीबों को डरा-धमकाकर शिकायत वापस कराई जा रही है, जिसकी वे उच्च स्तरीय जांच करवाएंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे। उन्होंने निर्माण की खराब गुणवत्ता पर भी विभाग से जवाब तलब किया।
कार्यक्रम के समापन संबोधन में सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने सरकार के विजन को स्पष्ट किया और स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे डिंडौरी की जरूरतों के आधार पर ठोस प्रोजेक्ट तैयार करें, ताकि वे उन्हें केंद्र और राज्य स्तर पर स्वीकृत करा सकें। कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक रूप से 15 हितग्राहियों को मंच से चाबियाँ सौंपी गईं, जबकि शेष 15 को परिषद कार्यालय से चाबियाँ दी जाएंगी।
कार्यक्रम के उपरांत मीडिया से मुखातिब होते हुए विधायक ओंकार सिंह मरकाम ने और भी तल्ख तेवर दिखाए। उन्होंने 'माँ की बगिया' योजना को पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाली योजना बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार के पिछले कार्यकाल में लगाए गए 6 करोड़ पौधों में से 6 लाख भी नहीं बचे, वह सरकार अब बेमौसम पौधरोपण कर जनता के पैसे की बर्बादी और बंदरबाँट कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ सरकार ही दोषी हो और सरकार ही जांचकर्ता, वहाँ आम आदमी को न्याय की उम्मीद कम ही रहती है।
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