डिंडोरी। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत दो दिन पूर्व हुए आवास आवंटन ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। शहर के गलियारों से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अपात्र लोगों को रेवड़ियों की तरह आवास बांट दिए गए हैं, जबकि असली जरूरतमंद आज भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
CMO की चुप्पी बढ़ा रही है संदेह
आवास आवंटन की सूची में कथित हेरफेर की खबरों के बीच जब मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से लाभार्थियों की सूची मांगी गई, तो उन्होंने अब तक सूची उपलब्ध नहीं कराई है। प्रशासन की यह टालमटोल नीति पारदिर्शता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर प्रशासन वह सूची सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं?
RTI का सहारा और भोपाल तक पहुंची शिकायत
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए अब RTI (सूचना का अधिकार) का सहारा लिया गया है। हमारी टीम ने अब तक भोपाल स्थित मुख्यालय को आवास आवंटन के संबंध में भेजी गई हर एक चिट्ठी और पत्राचार की जानकारी मांगी है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—हर एक परत खुलेगी और सच सामने लाया जाएगा कि आखिर वे कौन लोग हैं जो गरीबों के हक पर डाका डाल रहे हैं।
विधायकों ने भी मोर्चा खोला
आवासों के निर्माण की गुणवत्ता और अपात्रों के चयन को लेकर राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है:
ओंकार सिंह मरकाम (विधायक): इन्होंने मंच से खुलकर आवास आवंटन में अपात्रों को शामिल किए जाने की आवाज उठाई है और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने का संकल्प जताया है।
कमिश्नर पीएम आवास को लिखा पत्र
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हमने मोहित बुंदस (कमिश्नर, पीएम आवास, भोपाल) को विस्तृत पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम और संदिग्ध आवंटन की जानकारी दी है। अब भोपाल से आने वाले जवाब का इंतजार है।
"हमारा एकमात्र लक्ष्य है कि भ्रष्टाचार के इस खेल को खत्म किया जाए और पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार मिले। प्रशासन चाहे जितनी जानकारी छुपा ले, सच्चाई सबके सामने आकर रहेगी।"
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