डिंडोरी (मध्य प्रदेश): जिला पंचायत कार्यालय में आज दोपहर उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब जिले के सातों ब्लॉकों से आईं दर्जनों एमडीएम (MDM) और सांझा चूल्हा समूह की महिलाएँ अपनी व्यथा लेकर जिला पंचायत सीईओ कार्यालय पहुँचीं। पिछले चार महीनों से राशि न मिलने और राशन की भारी किल्लत से जूझ रही इन महिलाओं का धैर्य अब जवाब दे गया है।
दोपहर 3
बजे जब महिलाएँ अपनी मांगों को लेकर
सीईओ और एमडीएम प्रभारी रामजीवन वर्मा
से मिलने पहुँची, तो उन्हें कार्यालय
के बाहर ही रोक दिया गया। महिलाओं को बताया गया कि अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं और
उन्हें कलेक्टर से मिलने की सलाह दी गई। इस बेरुखी ने महिलाओं के आक्रोश को और बढ़ा
दिया।
कर्ज
के बोझ तले दबी महिलाएँ, घर में चूल्हा जलना मुश्किल
समूह की महिलाओं ने कैमरे के सामने अपना
दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि पिछले 4
महीनों से फूटी कौड़ी नहीं मिली है।
- संतोषी परसते (जिला अध्यक्ष) और हेमवती सोनवानी (जिला सचिव) ने
बताया कि राशि न मिलने के कारण वे भारी कर्ज में डूब चुकी हैं।
- इमरान अंसारी (प्रभारी डिंडोरी) के
नेतृत्व में पहुँची महिलाओं में
जोगता बाई (पिपरिया) ने भावुक होते हुए कहा,
"कर्ज देने वाले अब घर आकर पैसे
मांग रहे हैं, हमारे खुद के घरों में खाने को दाना नहीं है, हम
बच्चों को कर्ज लेकर कब तक खिलाएं?"
- प्रेमवती जी (भूसंडा) और धनिया बाई पेंड्रो (अध्यक्ष, करौंदा
ग्राम) ने बताया कि राशन इतना कम मिल रहा है कि उससे बच्चों का
पेट भरना नामुमकिन हो गया है।
बर्तनों
का घोटाला? शिक्षकों के खाते में क्यों गई राशि?
एक और गंभीर मुद्दा बर्तनों की राशि का
सामने आया है। महिलाओं का आरोप है कि बर्तनों के लिए जारी हुई राशि समूहों के बजाय
शिक्षकों के खातों में डाल दी गई है।
"शिक्षक हमें बर्तन नहीं दे रहे हैं। हम अपने घरों से बर्तन
लाकर बच्चों को खाना खिला रहे हैं। जब अन्य जिलों में राशि समूह के खाते में आई है, तो
डिंडोरी में अलग व्यवस्था क्यों?" — समूह
सदस्य
हालात इतने बदतर हैं कि गरीब ग्रामीण
बच्चे अपने घरों से थालियां लेकर स्कूल आने को मजबूर हैं। जो बच्चे बर्तन नहीं ला
पाते, वे भूखे रह जाते हैं। यही स्थिति आंगनबाड़ी के छोटे बच्चों की
भी है, जिन्हें न नाश्ता मिल रहा है न सही पोषण।
अधिकारी
का पल्ला झाड़ना: "पूरे प्रदेश का यही हाल है"
जब इस मामले में एमडीएम प्रभारी रामजीवन वर्मा
से बात की गई, तो उन्होंने पल्ला
झाड़ते हुए कहा कि यह स्थिति पूरे प्रदेश में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा
मामला कलेक्टर के संज्ञान में है और वही सीधे इसे देख रही हैं।
अंतिम
उम्मीद: कलेक्टर को ज्ञापन
अधिकारियों के नकारात्मक रवैये के बाद
अब संतोषी परसाते
और उनके साथ आईं महिलाएँ अपनी आखिरी
उम्मीद लेकर कलेक्टर महोदया
के पास ज्ञापन लेकर जा रही हैं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक पिछला भुगतान नहीं होता और बर्तनों की राशि उनके
खातों में नहीं आती, वे काम शुरू नहीं कर पाएंगी। वर्तमान में कई समूहों ने चूल्हा
बंद कर दिया है।
ब्यूरो रिपोर्ट, डिंडोरी
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